हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा जारी की गई पुलिस कांस्टेबल भर्ती की मेरिट लिस्ट ने प्रदेश के युवाओं और शिक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. कट-ऑफ लिस्ट के आंकड़ों में एक ऐसा 'खेल' नजर आ रहा है, जिसने आरक्षित श्रेणियों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. जहां सामान्य श्रेणी (General/Unreserved) की कट-ऑफ मात्र 52.17 पर रुकी है, वहीं ईडब्ल्यूएस (EWS) की कट-ऑफ 71.93 तक जा पहुंची है.
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कट-ऑफ के आंकड़ों ने चौंकाया
इस भर्ती में केवल ईडब्ल्यूएस ही नहीं, बल्कि अन्य आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ भी सामान्य श्रेणी से कहीं अधिक है:
- सामान्य (UR): 52.17
- EWS: 71.93
- BCB: 70
- BCA: 65
- OSC: 64
- DSC: 57.85
रेलवे पुलिस के आंकड़ों में भी यही अंतर देखा गया है, जहाँ सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ 75 है और ईडब्ल्यूएस की 81 तक पहुँच गई है.
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
हरियाणा की भर्ती विशेषज्ञ श्वेता ढुल ने इस मेरिट लिस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनके अनुसार, यह स्थिति 'सेक्शनल कट-ऑफ' लागू करने की वजह से हुई है, जो कि संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध है.
मैग्रेशन का अभाव: संविधान और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित नियमों के अनुसार, यदि आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है, तो उसे 'ओपन कैटेगरी' (General) में शामिल किया जाना चाहिए. लेकिन इस भर्ती में ऐसा नहीं किया गया.
बाहरी राज्यों को लाभ: विशेषज्ञों का आरोप है कि सामान्य श्रेणी को 'ओपन कैटेगरी' रखने के कारण अन्य राज्यों (यूपी, बिहार, राजस्थान, हिमाचल) के उम्मीदवार कम अंक (52) लाकर भी चयनित हो रहे हैं, जबकि हरियाणा के ही गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चे 70 अंक लाकर भी बाहर हैं.
भर्ती अटकाने की 'मंशा' पर सवाल
युवाओं का आरोप है कि सरकार और आयोग जानबूझकर ऐसे नियम बना रहे हैं जिससे भर्ती कोर्ट में अटक जाए. तर्क यह दिया जा रहा है कि एक ही सीईटी (CET) को लंबे समय तक खींचने और चुनावी लाभ लेने के लिए ऐसा किया जा रहा है. यदि भर्ती कोर्ट में जाती है, तो यह वर्षों तक लटक सकती है, जैसा कि क्लर्क भर्ती के मामले में देखा गया था.
युवाओं में हताशा और विरोध
इस कट-ऑफ लिस्ट के बाद सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया है. कई अभ्यर्थी मानसिक तनाव और हताशा में हैं. श्वेता ढुल का कहना है कि "मिशन मैरिट" के नाम पर मैनिपुलेशन किया जा रहा है. हरियाणा के गांव-देहात के वे युवा जो खेलों और शारीरिक दक्षता में माहिर हैं, वे इस जटिल और विवादित चयन प्रक्रिया के कारण वर्दी पहनने के अपने सपने से दूर होते जा रहे हैं.
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