हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है. पंचकूला में चल रहे फिजिकल टेस्ट में दौड़ लगाते समय महेंद्रगढ़ के 27 वर्षीय युवक कपिल की अचानक तबीयत बिगड़ने और दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. घर से खाकी पहनने का सपना लेकर निकले कपिल की इस असमय मौत से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है, उनकी गर्भवती पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल है. इस घटना ने भर्ती केंद्रों पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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फिजिकल टेस्ट के दौरान ट्रैक पर गिरा युवक
हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन आयोग (HSSC) द्वारा करीब 5500 कांस्टेबल पदों के लिए पंचकूला में भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है. इसी भर्ती के फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के लिए महेंद्रगढ़ जिले के गांव सैदापुर का रहने वाला 27 वर्षीय कपिल बुधवार को पंचकूला पहुंचा था. वह लंबे समय से इस भर्ती के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था.
नियमों के मुताबिक, अभ्यर्थियों को 12 मिनट में ढाई किलोमीटर (2.5 किमी) की दौड़ पूरी करनी थी. कपिल ने पहला राउंड सफलतापूर्वक पूरा भी कर लिया था, लेकिन दूसरे राउंड के दौरान अचानक उसकी सांस फूलने लगी और वह ट्रैक पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा.
अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
ट्रैक पर गिरते ही मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कपिल को संभाला और तुरंत पंचकूला के सुनील अस्पताल पहुंचाया. वहां से गंभीर हालत को देखते हुए उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार, दौड़ते समय कपिल की हार्ट बीट अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई, जिससे उसे दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा और उसकी जान चली गई.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
कपिल की 4 साल पहले शादी हुई थी और उसकी एक 3 साल की बेटी है. वर्तमान में कपिल की पत्नी गर्भवती है. हंसते-खेलते घर से वर्दी का सपना लेकर निकले कपिल की इस अंतिम विदाई ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है. मां और गर्भवती पत्नी सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है. पूरा गांव इस उम्मीद में बैठा था कि कपिल इस बार खाकी पहनकर लौटेगा, लेकिन उसकी मौत की खबर ने परिजनों को बेसुध कर दिया है.
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद भर्ती प्रक्रिया में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. इससे पहले भर्ती के पहले ही दिन हिसार के एक अभ्यर्थी का दौड़ के दौरान पैर टूट गया था. अब युवाओं और जानकारों की मांग है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए भर्ती केंद्रों पर कड़े मेडिकल स्क्रीनिंग टेस्ट, एडवांस एम्बुलेंस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की पुख्ता तैनाती की जानी चाहिए.
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