हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद चरखी दादरी सीट पर 'वोट चोरी' और ईवीएम (EVM) में गड़बड़ी को लेकर मचा सियासी घमासान अब खत्म होता नजर आ रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों और आरोपों के बीच, दादरी से कांग्रेस उम्मीदवार रहीं मनीषा सांगवान ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका वापस ले ली है. इस कदम के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर ईवीएम का डेटा क्लियर करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.
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राहुल गांधी के दादरी वाले दावे पर सवाल
गौरतलब है कि चुनाव नतीजों के बाद राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर चरखी दादरी का नाम लेते हुए वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया था. मनीषा सांगवान ने इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिका वापस लेने के बाद अब बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का बड़ा मौका मिल गया है.
विधायक सुनील सांगवान का तीखा पलटवार
चरखी दादरी से बीजेपी विधायक सुनील सांगवान ने इस घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस की पुरानी आदत है बिना सबूत के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना. उन्होंने कहा, "याचिका वापस लेना इस बात की पुष्टि करता है कि कांग्रेस के पास कोई सबूत नहीं थे. वे केवल अपनी हार की खीज मिटाने के लिए जनता में भ्रम फैला रहे थे."
ऑडियो वायरल विवाद और मारपीट का मामला
बीजेपी विधायक ने मनीषा सांगवान पर एक नया और गंभीर आरोप भी लगाया है. उन्होंने एक कथित वायरल ऑडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि मनीषा सांगवान ने एक व्यक्ति से वोट के बदले दिए गए 1 लाख रुपये वापस मांगे थे. सुनील सांगवान के अनुसार, इस मामले में सुनील जांगड़ा नामक व्यक्ति के साथ मारपीट भी हुई थी और इसी विवाद के चलते कानूनी फजीहत से बचने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी को अपनी याचिका वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा.
क्या थे मनीषा सांगवान के आरोप?
याचिका वापस लेने से पहले मनीषा सांगवान ने बीजेपी विधायक पर ईवीएम में धांधली, जाति-धर्म के नाम पर वोट मांगने और तय सीमा से अधिक चुनावी खर्च करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे. हालांकि, अब याचिका वापस होने के साथ ही दादरी की 'वोट चोरी' वाली कहानी का पटाक्षेप हो गया है.
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