हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से पैदा हुए संकट के बीच पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कराने के साथ पेयजल जैसी जरूरी सेवाएं शुरू कराने में भी मदद की गई है. कैथल, रेवाड़ी और हिसार समेत कई जगहों पर पुलिस ने बिजली विभाग के अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों के साथ मिलकर काम किया. इससे कई गांवों और स्थानीय इलाकों को राहत मिली.
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हालांकि, बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल का असर प्रदेश के कई हिस्सों में देखने को मिला. करीब 15 जिलों में बिजली संकट की खबरें सामने आईं. कई जगहों पर लंबे समय तक बिजली नहीं आने से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए. इस बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारी संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया है.
बिजली संकट के बीच पुलिस ने कैसे संभाला मोर्चा?
बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के बाद हरियाणा पुलिस ने बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर कई जगहों पर सप्लाई बहाल कराने में मदद की. कैथल के बलीयर कलां 66 केवी स्टेशन के चार में से तीन फीडर चालू कराए गए. वहीं, रेवाड़ी के भाडावास पावर हाउस के सभी छह फीडर चालू करवाए गए. इससे 100 से अधिक गांवों को राहत मिली.
हिसार के आदमपुर में पुलिस ने बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर थाने और आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कराई. महावीर कॉलोनी में वाटर वर्क्स का जनरेटर भी ठीक करवाया गया. इसके बाद पेयजल आपूर्ति शुरू हो सकी. पानीपत में भी बिजली बहाल कराने के प्रयास किए गए.
उधर, करनाल में बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग पावर हाउसों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. असंध और निसिंग थाना पुलिस के साथ सदर बाजार चौकी की टीमों ने भी बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय किया.
पुलिस बिजली के फॉल्ट ठीक कराने के लिए सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ले रही है. पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए वह 24 घंटे तत्पर है.
15 जिलों में बिजली संकट, कई जगह सड़क पर उतरे लोग
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर गुरुवार से ही दिखाई देने लगा था. शुक्रवार को भी कई इलाकों में आपूर्ति प्रभावित रही. हिसार के पॉश इलाकों में करीब 24 घंटे तक बिजली नहीं आई. वहीं, गुरुग्राम और हांसी के कई शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 20 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही.
लंबे समय तक बिजली नहीं आने से परेशान लोगों ने हिसार में सड़क जाम कर दिया. कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी लोगों ने विरोध जताया. बिजली संकट का असर संस्थानों पर भी पड़ा. कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने कामकाज स्थगित रखने का फैसला किया. वहीं, पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो यूनिट बंद कर दी गईं.
अनिल विज ने बातचीत के लिए बुलाए बिजली कर्मचारी
बिजली संकट के बीच ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की अपील की. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर चर्चा करने के लिए तैयार है. इनमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई का विकल्प भी शामिल है.
बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बातचीत का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. मोर्चा के प्रवक्ता रविन्द्र घनघस ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि मंत्री की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया है और दोपहर 3 बजे रेस्ट हाउस में बैठक प्रस्तावित है.
हालांकि, मोर्चा के उपाध्यक्ष बलजीत बेनीवाल ने कहा कि कर्मचारियों की मुख्य मांग गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को रद्द करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंस रद्द होने के बाद ही हड़ताल वापस लेने पर बात होगी.
बिजली इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन इंजीनियर शैलेन्द्र दूबे, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर पुनीत कुंडू और महासचिव इंजीनियर रविन्दर सिंह घनघस ने पंचकूला स्थित उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के मुख्यालय पर सभा की.
इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को कैबिनेट की बैठक बुलाकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की अनुमति नहीं दी जाएगी.
संगठनों ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर कंपनी को दिए गए लाइसेंस रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई.
रणदीप सुरजेवाला ने सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने वीडियो जारी कर बिजली संकट को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग बिजली और पानी की परेशानी झेल रहे हैं. इन्वर्टर तक काम करना बंद कर चुके हैं और कारोबार प्रभावित हो रहे हैं.
सुरजेवाला ने दावा किया कि पीने के पानी, दूध और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी लोगों को प्रदर्शन करना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिजली वितरण व्यवस्था एक निजी कंपनी के मुनाफे के लिए सौंपना चाहती है. साथ ही उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की.
बिजली संकट का आगे क्या होगा?
हरियाणा में बिजली आपूर्ति बहाल कराने के लिए पुलिस और तकनीकी कर्मचारी कई जगहों पर जुटे हैं. इससे कुछ इलाकों में लोगों को राहत मिली है. दूसरी ओर, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने के लिए सरकार ने बातचीत की पहल की है.
हालांकि, कर्मचारी संगठन निजी कंपनी को दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने की मांग पर अड़े हैं. ऐसे में हड़ताल खत्म होने और बिजली व्यवस्था सामान्य होने का रास्ता सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से निकलने की उम्मीद है.
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