Haryana Private Power Company Controversy: हरियाणा में अब निजी कंपनी सीधे आम लोगों के घरों और कारखानों तक बिजली पहुंचाने वाली है. हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने इसके लिए एक निजी फर्म को लाइसेंस देकर हरी झंडी दे दी है. शुरुआत के तौर पर यह व्यवस्था दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के विकल्प के रूप में गुरुग्राम और नूह जिलों में लागू करने की योजना है. दरअसल, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने 'Eleven Power Private Limited (इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड)' नामक कंपनी को 25 साल की अवधि के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस जारी कर दिया है.
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जमीन के नीचे बिछेगा आधुनिक 33 केवी नेटवर्क
जून 2025 में गठित हुई 'इलेवन पावर' कंपनी के अध्यक्ष गुरुग्राम स्थित प्रसिद्ध मेदांता अस्पताल के सह-संस्थापक सुनील सचदेवा हैं. यह कंपनी हरियाणा के बुनियादी ढांचे में 4717 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने का दावा कर रही है.
कंपनी की सबसे बड़ी खासियत इसका आधुनिक ढांचा होगा:
- 33 केवी का नेटवर्क: पारंपरिक 11 केवी लाइन के बजाय कंपनी 33 केवी की आधुनिक लाइनें बिछाएगी, जो चार गुना अधिक भार सह सकती हैं.
- अंडरग्राउंड केबलिंग: हवा में लटकते तारों और खंभों के बजाय पूरा नेटवर्क पूरी तरह भूमिगत (Underground) होगा.
- गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन: कंपनी कम जगह घेरने वाले गैस इंसुलेटेड सबस्टेशन बनाएगी, जो आंधी, बारिश और खराब मौसम से अप्रभावित रहेंगे और बिजली कटौती को न के बराबर कर देंगे.
- स्वतंत्र ढांचा: यह कंपनी DHBVNL के किसी भी खंभे या तार का इस्तेमाल किए बिना अपना खुद का नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी.
कैबिनेट मंत्री अनिल विज विरोध में उतरे
हरियाणा सरकार में बिजली विभाग के प्रभारी कैबिनेट मंत्री अनिल विज इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं. वे शुरू से ही इस निजीकरण और समानांतर लाइसेंस के पक्ष में नहीं थे. अनिल विज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि HERC द्वारा इलेवन पावर को दिए गए इस लाइसेंस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील दायर करेगी. इस स्थिति ने सरकार और HERC के फैसलों के बीच के अंतर्विरोध को उजागर कर दिया है, जिससे जनता और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि जब कैबिनेट मंत्री खुद खिलाफ हैं, तो यह व्यवस्था कैसे लागू हुई.
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान
इस फैसले के विरोध में राज्य के बिजली कर्मचारी संगठन और यूनियन एकजुट हो गए हैं. हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन समेत कई अन्य कर्मचारी यूनियनों ने 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है.
कर्मचारियों के काम न करने के इस फैसले से आने वाले दिनों में आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. यदि इन दिनों में आंधी या तकनीकी खराबी के कारण बिजली सप्लाई बाधित होती है, तो उसे ठीक करने वाला कोई नहीं होगा, जिससे व्यापक स्तर पर बिजली कटौती की संभावना बन गई है.
पक्ष में दिए जा रहे तर्क: प्रतिस्पर्धा से सुधरेगी सेवा और उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प
निजी कंपनी के प्रवेश का समर्थन करने वाले समूहों, जिनमें गुरुग्राम इंडस्ट्रियल एसोसिएशन और बड़े कॉर्पोरेट घराने शामिल हैं, का मानना है कि यह फैसला उपभोक्ता हित में है:
- बेहतर विकल्प: अन्य राज्यों की तर्ज पर अब उपभोक्ताओं के पास सरकारी (DHBVNL) या प्राइवेट (इलेवन पावर) में से बेहतर विकल्प चुनने की आजादी होगी.
- सेवा में सुधार: जब बाजार में प्रतिस्पर्धा होगी, तो सरकारी विभाग को भी टिके रहने के लिए अपनी सेवाओं, शिकायत निवारण और बुनियादी ढांचे में सुधार करना पड़ेगा.
- फाल्ट-फ्री सिस्टम: नए और आधुनिक सबस्टेशन तथा अंडरग्राउंड केबल से ट्रांसफार्मर जलने और बार-बार बिजली जाने की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी.
विरोध में उठ रहे ये सवाल
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रबींद्र घंघास, प्रोफेसर संपत सिंह (INLD) और वामपंथी कर्मचारी संगठनों ने इस मॉडल के गंभीर खतरे बताए हैं:
राजस्व को झटका: निजी कंपनी का मुख्य ध्यान गुरुग्राम और आईएमटी क्षेत्रों के बड़े औद्योगिक एवं व्यावसायिक ग्राहकों पर होगा. यदि उद्योग DHBVNL को छोड़कर प्राइवेट कंपनी की तरफ चले गए, तो सरकारी निगम की कमाई का मुख्य जरिया खत्म हो जाएगा.
क्रॉस सब्सिडी का गणित: वर्तमान में सरकारी विभाग थर्मल, हाइड्रो आदि स्रोतों से ₹7.5 प्रति यूनिट में बिजली खरीदकर उद्योगों को ₹10 प्रति यूनिट पर बेचता है. इस मुनाफे का उपयोग किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को ₹2.5 प्रति यूनिट की सस्ती दर पर बिजली देने में किया जाता है.
महंगी बिजली का डर: अगर उद्योग DHBVNL से बिजली लेना बंद कर देंगे, तो घाटे की भरपाई के लिए विभाग को आम नागरिकों, ग्रामीणों और किसानों से भी बिजली की पूरी लागत (₹7 प्रति यूनिट या उससे अधिक) वसूलनी पड़ेगी, जिससे आम आदमी का बिजली बिल काफी बढ़ जाएगा.
HERC तय करेगा मूल दरें, DHBVNL के हजारों करोड़ के ढांचे पर संकट
कर्मचारी यूनियनों ने यह भी चिंता जताई है कि DHBVNL ने गुरुग्राम में हजारों करोड़ रुपये खर्च करके जो विशाल ढांचा खड़ा किया है, ग्राहकों के ट्रांसफर होने से वह पूरी तरह बेकार और रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो जाएगा.
हालांकि, दरों को लेकर पैदा हो रही आशंकाओं पर यह स्पष्ट किया गया है कि निजी कंपनियां अपनी मनमर्जी से रेट तय नहीं कर सकतीं. बेस टैरिफ और अधिभार तय करने का पूरा अधिकार 'हरियाणा विद्युत नियामक आयोग' (HERC) के पास ही रहेगा और इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को उसी निर्धारित दर के दायरे में काम करना होगा.
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