हरियाणा में अनोखी शादी: ना पंडित बुलाए ना लिए सात फेरे, अंबेडकर जी की तस्वीर के सामने रचाया ब्याह!

Haryana News: हरियाणा के चरखी दादरी में मनिंदर और मोनिका ने बिना दहेज, बिना पंडित और बिना सात फेरों के बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर के सामने प्रतिज्ञा लेकर अनोखी शादी रचाई है. इस पढ़े-लिखे जोड़े ने समाज को जागरूक करने के लिए शादी से पहले अपना एचआईवी और ब्लड टेस्ट भी करवाया.

Unique wedding in Haryana
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न्यूज तक डेस्क

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Unique wedding in Haryana: हरियाणा के चरखी दादरी में एक ऐसा अनोखा विवाह हुआ है, जिसने समाज में फिजूलखर्ची और रूढ़िवादिता को छोड़कर सादगी की एक नई मिसाल पेश की है. यहां एक पढ़े-लिखे जोड़े ने परंपराओं के नाम पर होने वाले लाखों के दिखावे और दहेज से तौबा कर ली. इस शादी की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें ना तो कोई पंडित बुलाया गया और ना ही अग्नि के सामने सात फेरे लिए गए, बल्कि नवदंपत्ति ने शादी के बंधन में बंधने से पहले अपना HIV और ब्लड टेस्ट करवाया और फिर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने प्रतिज्ञा लेकर एक-दूसरे का हाथ थाम लिया.

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शादी से पहले कराया HIV और ब्लड टेस्ट

इस शादी की सबसे बड़ी और अनूठी बात यह रही कि विवाह के बंधन में बंधने से पहले लड़का और लड़की दोनों ने अपना एचआईवी (HIV) और सभी जरूरी ब्लड टेस्ट करवाए. दोनों ने बकायदा अपनी मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया और जब सब कुछ नॉर्मल और सही पाया गया, तब जाकर शादी के फैसले को आगे बढ़ाया. इस पहल के पीछे इस जोड़े का मकसद समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है. उनका कहना है कि युवाओं को बिना किसी झिझक के विवाह से पहले स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ रह सके.

ना बुलाए पंडित, ना लिए सात फेरे

आमतौर पर शादियों में मंत्रोच्चारण, पंडित और अग्नि के सामने सात फेरे मुख्य रस्म होते हैं, लेकिन इस शादी में ऐसा कुछ नहीं हुआ. मनिंदर और मोनिका ने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने खड़े होकर एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जीवनभर साथ निभाने की पांच विशेष प्रतिज्ञाएं लीं. इन प्रतिज्ञाओं में एक-दूसरे का सम्मान करना, भ्रूण हत्या न करना, पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगाना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना शामिल था.

दहेज और फिजूलखर्ची से पूरी तरह परहेज

आजकल शादियां जहां दिखावे और करोड़ों की फिजूलखर्ची का जरिया बनती जा रही हैं, वहीं इस विवाह में ना तो कोई बैंड-बाजा था, ना डीजे और ना ही हजारों मेहमानों की भीड़. दोनों पक्षों के केवल परिवार के लोग शामिल हुए. सबसे बड़ी बात यह रही कि वर पक्ष ने दहेज लेने से पूरी तरह इंकार कर दिया और वधू पक्ष ने भी कोई दान-दहेज नहीं दिया.

मनिंदर और मोनिका को इस साधारण और आदर्श शादी की प्रेरणा मनिंदर के पिता मास्टर कृष्ण दहिया और सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल से मिली. संजय रामफल ने तो मनिंदर को यह भी सलाह दी थी कि मोनिका को प्रपोज करते समय गुलाब का फूल नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रतीक के रूप में एक 'कलम' (Pen) भेंट करें. समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली इस अनूठी शादी की अब हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है.

 

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