हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी और सरकार को हिला देने वाले 590 करोड़ रुपए के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में एक सनसनीखेज मोड़ आ गया है. इस पूरे मामले की जांच से जुड़े और दबाव झेल रहे हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड(HPGCL) के अकाउंट ऑफिसर बलवंत सिंह ने चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय की आठवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी है. इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और परिवार के दावों ने इस पूरे मामले को और भी ज्यादा संदिग्ध बना दिया है.
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सचिवालय में 3 घंटे बिताने के बाद उठाया खौफनाक कदम
बलवंत सिंह के सुसाइड के दिन का घटनाक्रम काफी असामान्य था. आमतौर पर वे सुबह 9:30 बजे दफ्तर के लिए निकलते थे, लेकिन उस दिन वे 10:00 बजे घर से निकले. निकलने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी को गले लगाया और बेटे से कहा कि 'जब भी कुछ बनना तो बड़ा अफसर बनना'. इसके बाद वे अपने ड्राइवर के साथ सचिवालय पहुंचे और विजिटर पास बनवाकर अंदर दाखिल हुए. हैरानी की बात यह है कि जान देने से पहले बलवंत सिंह करीब 3 घंटे तक सचिवालय के अंदर ही मौजूद थे. उन्होंने वहां किससे मुलाकात की और वे क्या बात करना चाहते थे, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है.
तीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
बलवंत सिंह के परिवार और उनके बुआ के लड़के राजपाल यादव ने आरोप लगाया है कि विभाग के ही तीन अधिकारी अमित दीवान, आशीष गोगिया और राजेश उन्हें पिछले दो महीनों से लगातार प्रताड़ित कर रहे थे. अमित दीवान जो एचपीजीसीएल में सीएफओ (CFO) थे, पहले से ही इस घोटाले में रिश्वत लेने के आरोप में अंबाला जेल में बंद हैं. परिवार का कहना है कि इन अधिकारियों ने बलवंत को घोटाले में फंसा दिया था. पंचकूला पुलिस ने मृतक की पत्नी की शिकायत पर इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है.
चेक बुक और नोटिंग न करने का था भारी दबाव
परिजनों के मुताबिक बलवंत सिंह एक बेहद ईमानदार अधिकारी थे, लेकिन विभाग के उच्चाधिकारी उन पर गलत तरीके से चेक जारी करने का दबाव बना रहे थे. उन पर यह भी दबाव डाला जा रहा था कि वे रिकॉर्ड बुक में यह नोट न करें कि कौन सा चेक किसे और कितने अमाउंट का दिया गया है. राजपाल यादव ने दावा किया कि बलवंत ने उन्हें फोन पर बताया था कि विभाग का एक डायरेक्टर स्तर का अधिकारी चेक बुक को लेकर उन्हें लगातार धमका रहा है. इसी मानसिक तनाव और दबाव के कारण उन्होंने मौत को गले लगाना बेहतर समझा.
कहां गायब है वो 'फाइनल नोट' और किन IAS अफसरों के हैं नाम?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उस सुसाइड नोट को लेकर है जिसका दावा बलवंत सिंह के परिवार ने किया है. परिवार का कहना है कि बलवंत ने मरने से पहले एक फाइनल नोट छोड़ा है, जिसमें कुछ बड़े IAS अधिकारियों के नाम शामिल हैं. 4 तारीख को हुई इस घटना के दो दिन बाद भी वह नोट सार्वजनिक नहीं किया गया है. परिवार का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन उस नोट को सामने नहीं ला रहे हैं क्योंकि उसमें बड़े अधिकारियों के नाम हैं. विपक्ष भी इस मामले में सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश कर रही है?
क्या है 590 करोड़ का आईडीएफसी बैंक घोटाला?
यह पूरा मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा से जुड़ा है, जहां सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये का गबन किया गया और उन्हें फर्जी तरीके से ट्रांसफर किया गया. हालांकि सरकार का दावा है कि उन्हें बैंक से पैसा वापस मिल गया है, लेकिन बैंक का पैसा आखिर कहां गया और इसे किसने भेजा, इसकी जांच अब CBI कर रही है. बलवंत सिंह से भी सीबीआई ने एक बार पूछताछ की थी और उनका फोन भी एक दिन के लिए जब्त किया गया था. अब बलवंत की मौत के बाद सवाल यह है कि क्या इस घोटाले के राज भी उनके साथ दफन हो जाएंगे या फिर सुसाइड नोट में छिपे नाम सामने आएंगे.
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