हरियाणा में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा निकाली गई असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेजी) की भर्ती को रद्द कर दिया है. जस्टिस त्रिभवन दहिया की सिंगल बेंच ने इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हरियाणा सरकार के सिलेक्शन प्रोसेस को गलत ठहराया है.
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35% क्राइटेरिया पर गिरी गाज
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 35% का पासिंग क्राइटेरिया रहा. कोर्ट ने भर्ती में लागू किए गए इस 35% के नियम को गलत माना है. बता दें कि छात्र पिछले 4 महीनों से इस नियम के खिलाफ एचपीएससी के बाहर धरना दे रहे थे. कोर्ट के इस फैसले से आंदोलनकारी छात्रों की मांगों को बड़ा बल मिला है. यह भर्ती एडवर्टाइजमेंट नंबर 48/24 के तहत 613 पदों के लिए निकाली गई थी, जिसमें केवल 151 उम्मीदवार ही पास हो सके थे.
बाहरी उम्मीदवारों के दबदबे पर सियासी संग्राम
वीडियो रिपोर्ट में एचपीएससी के हालिया रिजल्ट्स को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी) के 67 पदों में से 41 पदों पर बाहरी राज्यों (ज्यादातर यूपी और बिहार) के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जबकि हरियाणा के केवल 19 युवा ही अपनी जगह बना पाए. वहीं, साइकोलॉजी के 85 पदों के लिए हुई परीक्षा में 400 अभ्यर्थी बैठे, लेकिन पास केवल 3 ही हो सके.
विपक्ष का सरकार पर हमला: इन नतीजों के बाद कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा और श्वेता ढुल ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. दीपेंद्र हुड्डा ने तंज कसते हुए कहा कि "यूपीएससी में हरियाणवी सबसे भारी, एचपीएससी में हमें मार गए बाहरी". विपक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या हरियाणा के युवा हिंदी और साइकोलॉजी पढ़ाने के लायक भी नहीं बचे हैं या सरकार जानबूझकर हरियाणा के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है.
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