हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले अभय सिंह ग्रेवाल, जिन्हें दुनिया 'आईआईटीएन बाबा' (IITian Baba) के नाम से जानती है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उनकी चर्चा किसी आध्यात्मिक दावे को लेकर नहीं, बल्कि उनकी शादी को लेकर हो रही है. आईआईटीएन बाबा ने कर्नाटक की रहने वाली प्रीतिका के साथ विवाह कर लिया है और हाल ही में वे अपनी नई दुल्हन के साथ पहली बार अपने पैतृक शहर झज्जर पहुंचे. आइए जानते है इन दोनों की पहली मुलाकात से लेकर फ्यूचर प्लानिंग की पूरी कहानी.
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महाशिवरात्रि और कोयंबटूर: पहली मुलाकात की कहानी
अभय सिंह और प्रीतिका की पहली मुलाकात साल 2025 में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हुई थी. यह मुलाकात तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित एक आश्रम (मंदिर) में हुई थी. प्रीतिका वहां मोक्ष और अध्यात्म की तलाश में आई थीं. दिलचस्प बात यह है कि दोनों का ही बैकग्राउंड साइंस से रहा है और यही वो समान धरातल था जिसने दोनों को करीब लाया. अभय सिंह ने बताया कि मुलाकात के दूसरे ही दिन उन्होंने प्रीतिका को शादी के लिए प्रपोज कर दिया था, जिसे शुरू में प्रीतिका ने एक मजाक समझा था.
ऋषिकेश के मनसा देवी मंदिर में लिए सात फेरे
करीब एक साल तक दोस्ती के रिश्ते में रहने के बाद, दोनों ने विवाह बंधन में बंधने का फैसला किया. इनकी शादी का संयोग भी भगवान शिव से जुड़ा रहा. 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के ही दिन उत्तराखंड के ऋषिकेश में मनसा देवी मंदिर में दोनों ने शादी रचाई. इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश में कानूनी तौर पर कोर्ट मैरिज की औपचारिकताएं भी पूरी कीं. सोमवार को जब वे झज्जर पहुंचे, तो उनकी मां ने पारंपरिक तरीके से बहू का स्वागत किया.
कौन हैं प्रीतिका?
आईआईटीएन बाबा की पत्नी प्रीतिका का शैक्षणिक बैकग्राउंड बेहद प्रभावशाली है. वे मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली हैं. उन्होंने मंगलौर के सेंट जोसेफ इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया है. इसके बाद उन्होंने एमआईटी मणिपाल से एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स (M.Tech) की डिग्री हासिल की. प्रीतिका ने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स में रिसर्च इंटर्नशिप भी की है. ब्रह्मांड के रहस्यों को खोजते-खोजते उनकी रुचि अध्यात्म की ओर बढ़ गई.
क्या है कपल का फ्यूचर प्लान?
अभय सिंह और प्रीतिका अब धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में रह रहे हैं. उनका उद्देश्य एक ऐसा आश्रम और विश्वविद्यालय बनाना है जहां आधुनिक विज्ञान और प्राचीन अध्यात्म का मिश्रण हो. वे कांगड़ा के पास 'गंजन महादेव' इलाके में एक ऐसा केंद्र विकसित करना चाहते हैं, जहां बच्चों को जीवन जीने की कला और शोध (Research) के अवसर मिलें. उनका मानना है कि शिक्षा केवल जीविका कमाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को समझने के लिए होनी चाहिए.
परिवार में खुशी का माहौल
आईआईटीएन बाबा के पिता, जो पेशे से वकील हैं, और उनकी माता अपने बेटे के इस फैसले से बेहद खुश हैं. पहले परिवार अभय के भविष्य और उनके अकेलेपन को लेकर चिंतित रहता था, लेकिन अब प्रीतिका के आने से उन्हें उम्मीद है कि अभय का जीवन व्यवस्थित रहेगा. झज्जर प्रवास के दौरान अभय ने अपने कुलदेवता के मंदिर में मत्था टेका और आशीर्वाद लिया.
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IITian Baba: दो साल बाद शादी करके घर लौटे Abhay Singh, माता-पिता से मिलकर क्या बोले ?
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