दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की विशाल रैली के बाद कांग्रेस पार्टी अब अपने अभियान को सीधे आम जनता के बीच ले जाने की तैयारी में जुट गई है. फरीदाबाद पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने पार्टी के अगले राजनीतिक रोडमैप का खुलासा करते हुए बताया कि रामलीला मैदान की रैली का यह स्वाभाविक 'नेचुरल फॉलो-अप' है. उन्होंने बताया कि 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तीसरे चरण के तहत 25 नवंबर तक (करीब 15-20 दिनों का कार्यक्रम) पूरे प्रदेश के गांवों, नुक्कड़ों और चौपालों पर जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता जनता के बीच जाकर चुनाव में कथित गड़बड़ियों और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर सीधे संवाद करेंगे.
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विपक्षी एकजुटता और युवाओं का समर्थन
रामलीला मैदान की रैली के प्रभाव पर चर्चा करते हुए बृजेंद्र सिंह ने कहा कि 1 नवंबर की रैली का सबसे बड़ा हासिल यह रहा कि पूरा विपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर एक मंच पर दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों और तथ्यों पर पहले विपक्षी दलों के बीच एकमतता नहीं थी, अब वे सभी दल इस बात पर आश्वस्त हो चुके हैं कि चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर विसंगतियां हैं. इसके साथ ही, जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्र संगठनों द्वारा चलाए गए आंदोलनों का भी इस मुहिम को मजबूत समर्थन मिला है, जिससे कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है.
'वोट चोरी', SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल
पूर्व सांसद ने देश में चुनावी प्रक्रिया और वोट प्रतिशत में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए:
डेटा में हेरफेर और समयसीमा: उन्होंने सवाल उठाया कि जब सब कुछ कंप्यूटराइज्ड और इलेक्ट्रॉनिक है, तो वोटिंग के दिन और उसके बाद के दो-तीन दिनों के भीतर वोट प्रतिशत में 6 से 7 प्रतिशत तक का उछाल कैसे आ जाता है?
इलेक्शन कमीशन की अंदरूनी फाइलों की नोटिंग्स: बृजेंद्र सिंह ने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर अधिकारी और इलेक्शन कमिश्नर्स खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और आयोग के अंदर चल रही गड़बड़ियों पर फाइलों में नोटिंग्स दर्ज कर रहे हैं. राहुल गांधी की प्रेस सम्मेलनों के बाद अधिकारियों को यह समझ आया कि डेटा बाहर निकल रहा है, जिसके बाद अपनी जवाबदेही से बचने के लिए फाइलों पर आपत्तियां दर्ज होना शुरू हुईं.
एसआईआर (SIR) और कागजी फॉर्म्स की जांच: उन्होंने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया, अपील खारिज होने और 93% अपीलों के सही पाए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि फर्जी तरीके से वोट काटने की मंशा से काम किया गया था, जिसका खुलासा बाद में जुडिशियरी के अधिकारियों की जांच में हुआ.
'1947 से पहले जैसी स्थिति': प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरा जताते हुए बृजेंद्र सिंह ने कहा कि स्थिति आज करीब-करीब वही बन चुकी है जैसी 1947 के पहले थी. देश के तमाम संवैधानिक और तटस्थ रहने वाले संस्थान आज निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे माहौल में केवल शांतिपूर्ण प्रतिरोध और जन-जागरूकता ही एकमात्र रास्ता है. चुनावी नतीजों और बीजेपी की रणनीति पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए गैर-लोकतांत्रिक हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है. हरियाणा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जीता हुआ चुनाव भी हाथ से निकाल दिया गया.
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