जाट आरक्षण आंदोलन में पवन सिंह की उम्रकैद की सजा टली, भाई ने सुनाई आपहबीती, जानें पूरा मामला

प्रवीण कुमार

17 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 17 2026 2:49 PM)

हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन मामले में अदालत ने पवन और अन्य आरोपियों की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है. हालांकि, कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद उनकी जेल से रिहाई में लगभग 2 महीने का समय लग सकता है.

पवन सिंह
पवन सिंह
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साल 2016 के बहुचर्चित जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद परिवारों में खुशी का माहौल है. अदालत ने दलजीत सिहाग और पवन उर्फ पना सहित तीन आरोपियों को बरी कर दिया है. पवन को धारा 302 (हत्या) के तहत उम्रकैद (अंतिम सांस तक) की सजा सुनाई गई थी, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया है. हालांकि, कानूनी प्रक्रियाओं और अन्य औपचारिकताओं के कारण उनकी जेल से रिहाई में लगभग दो महीने का समय लग सकता है.

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2016 आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे 23 मुकदमे

हरियाणा तक से खास बातचीत में पवन के भाई ने पूरी आपबीती साझा करते हुए बताया कि 2016 में जाट आरक्षण के दौरान जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब उपद्रवियों के कारण माहौल खराब हुआ था. उस समय पवन महज 11-12 साल के लगभग (नवी कक्षा का छात्र) था और पढ़ाई कर रहा था. घटनाक्रम के दौरान पवन पर कुल 23 मुकदमे दर्ज किए गए थे.

माता-पिता और बड़े भाई का उठ चुका है साया

पवन के भाई ने बताया कि इस लंबे संघर्ष के दौरान परिवार को भारी मानसिक और आर्थिक पीड़ा से गुजरना पड़ा. पवन के माता-पिता और बड़े भाई का निधन पहले ही हो चुका है. 11 साल तक दोनों भाइयों ने अकेले ही इस कानूनी लड़ाई को लड़ा. उन्होंने कहा, "अदालत के इस फैसले के लिए हम न्यायालय के बहुत आभारी हैं. 11 साल में जो दुख और दर्द परिवार ने झेला है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता."

समाज और सहयोगियों का जताया आभार

परिवार ने इस कठिन समय में साथ देने वाले समाज के लोगों, एनआरआई भाइयों और सहयोगियों का तहे दिल से धन्यवाद किया है. परिजनों का कहना है कि फैसले की खबर मिलते ही गांव और समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है.

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