हरियाणा कांग्रेस में मचे घमासान के बीच कुलदीप वत्स ने तोड़ी चुप्पी, बोले- 'पार्टी में बैठे गद्दारों पर हो कार्रवाई'

हरियाणा कांग्रेस के विधायक कुलदीप वत्स ने क्रॉस वोटिंग और पार्टी के भीतर 'गद्दारों' से नाराजगी जताते हुए साफ किया कि वह हुड्डा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने 1 मई से नए जोश के साथ राजनीति में सक्रिय होने और पार्टी को नुकसान पहुँचाने वाले 'आकाओं' के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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सोनिया सत्यानीता

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हरियाणा की राजनीति में पिछले कई दिनों से गायब चल रहे बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स आखिरकार कैमरे के सामने आए और उन्होंने अपनी नाराजगी की असली वजह साफ कर दी. राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग और पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से आहत कुलदीप वत्स ने साफ शब्दों में कहा कि वह पार्टी छोड़ने नहीं जा रहे, लेकिन कांग्रेस के भीतर बैठे 'मठाधीशों' के खिलाफ कार्रवाई की मांग जरूर कर रहे हैं.

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हुड्डा साहब मेरे पिता समान

कुलदीप वत्स ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया जिसमें कहा जा रहा था कि वे पाला बदल सकते हैं. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "आदमी का साया भी साथ छोड़ जाए, लेकिन मैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा का साथ नहीं छोड़ सकता. जब तक वे हैं, कुलदीप वत्स उनका बेटा बनकर उनके साथ खड़ा रहेगा." 

क्रॉस वोटिंग पर जताई गहरी पीड़ा

विधायक ने राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि जिन 5 विधायकों ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा है, उनके नाम सार्वजनिक होने चाहिए थे. वत्स ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठकर बड़े पदों का आनंद ले रहे कुछ नेता पार्टी को नुकसान पहुँचा रहे हैं. उन्होंने राहुल गांधी से मांग की कि जब तक इन 'आकाओं' पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हरियाणा और देश में कांग्रेस मजबूत नहीं हो सकती. 

'मेरा जमीर कोई नहीं खरीद सकता'

बीजेपी में जाने की चर्चाओं पर पलटवार करते हुए वत्स ने कहा, "बादली के बेटे का जमीर कोई नहीं खरीद सकता. ऐसी कोई ताकत या ऐसा कोई नोट नहीं बना जो मुझे खरीद ले." उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बीजेपी का कोई नेता या मुख्यमंत्री यह साबित कर दे कि उन्होंने कुलदीप वत्स को खरीदा है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे. 

1 मई से नई ऊर्जा के साथ उतरेंगे मैदान में

कुलदीप वत्स ने ऐलान किया कि वह इस पूरे घटनाक्रम से काफी आहत थे और 'डिस्टर्ब' थे, लेकिन अब वह इस सदमे से उभर चुके हैं. उन्होंने कहा, "1 मई के बाद मैं पूरे हरियाणा में अन्याय के खिलाफ लड़ाई का बिगुल फूकूंगा. 5 मई को मेरे जन्मदिन के बाद एक नई ऊर्जा और घायल शेर की तरह मैं अपनी राजनीतिक पारी को और मजबूती से आगे बढ़ाऊंगा." 

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