Manisha Bhiwani Case: 'बेटी के हत्यारों को सजा दिलाकर रहूंगा...' 29 जून से आमरण अनशन पर बैठेंगे पीड़ित पिता, प्रशासन को दी चेतावनी

भिवानी (हरियाणा) के बहुचर्चित टीचर मनीषा मामले में करीब 11 महीने बाद भी सीबीआई (CBI) द्वारा कोई खुलासा नहीं हुआ है जिसके बाद अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने प्रशासन की अनुमति के बिना भी 29 जून से भिवानी डीसी ऑफिस के सामने आमरण अनशन पर बैठने का कड़ा फैसला लिया है.

मनीषा भिवानी मामला
मनीषा भिवानी मामला

न्यूज तक डेस्क

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हरियाणा के भिवानी का बहुचर्चित टीचर मनीषा मामला एक बार फिर गरमा गया है. घटना को करीब 10-11 महीने बीत जाने के बाद भी जब स्थानीय पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ खाली रहे, तो हार मानकर अब पीड़ित परिवार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. मनीषा के पिता संजय कुमार ने ऐलान किया है कि वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए 29 जून से भिवानी डीसी ऑफिस के सामने आमरण अनशन पर बैठेंगे.

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सोमवार को मनीषा के पिता संजय अनशन की अनुमति (परमिशन) मांगने के लिए भिवानी के उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचे थे.

प्रशासन परमिशन दे या न दे, मैं अनशन पर जरूर बैठूंगा

हरियाणा तक से खास बातचीत में पीड़ित पिता संजय ने बताया कि 7 जून को हुई महापंचायत में उन्होंने फैसला लिया था कि वे अपनी बेटी के इंसाफ के लिए डीसी ऑफिस के आगे आमरण अनशन करेंगे. उन्होंने कहा, "हम कानून का पालन करते हुए प्रशासन से अनुमति लेने आए थे. अधिकारी से मुलाकात हुई है और उन्होंने फाइल नंबर दिया है. परमिशन मिले या न मिले, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. हम जो भी करेंगे, शांतिपूर्वक करेंगे. मैं 29 जून को डीसी ऑफिस के आगे आमरण अनशन पर जरूर बैठूंगा."

जब उनसे पूछा गया कि सरकार ने अगले कुछ महीनों के लिए धरना-प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाई हुई है, तो उन्होंने साफ कहा कि यह एक बेटी के न्याय की लड़ाई है. जब कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही, तो जनता की अदालत में जाने के अलावा उनके पास आखिरी हथियार यही बचा है.

10-11 महीने बीते, न पुलिस ने कुछ बताया और न CBI ने

संजय ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज तक पीड़ित परिवार को यह नहीं बताया गया कि जांच कहां तक पहुंची है. उन्होंने कहा, "सीबीआई का टाइम पीरियड पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ. वे कम से कम इतना तो स्पष्ट करें कि यह मर्डर है या सुसाइड? जब शुरुआत में एफआईआर ही मर्डर की दर्ज हुई थी, तो साफ है कि यह मर्डर ही है."

सुसाइड नोट को समाज और परिवार ने नकारा

11-12 अगस्त को जब मनीषा का शव बरामद हुआ था, तो मामला साफ तौर पर हत्या का लग रहा था. हालांकि, बाद में एक कथित सुसाइड नोट भी सामने आया था. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय ने कहा, "मेरी अंतरात्मा ही नहीं, पूरे समाज की अंतरात्मा कहती है कि यह मर्डर है. इस सुसाइड नोट को कोई नहीं मानता. भला ऐसी कौन सी आत्महत्या होती है जिसमें बेटी का गला काट दिया जाए और चेहरा जला दिया जाए? यह एक जघन्य अपराध है."

अकेले शुरू करेंगे लड़ाई, समाज से सहयोग की उम्मीद

मनीषा के पिता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस अनशन के लिए किसी खाप, किसान संगठन या सामाजिक संगठन को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित नहीं किया है. वे इस लड़ाई की शुरुआत अकेले ही करेंगे. हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि समाज के लोग अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए उनका साथ जरूर देंगे. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर आज ये अपराधी बच गए, तो कल किसी और की बहन-बेटी के साथ ऐसा अन्याय होगा.

अब सबकी नजरें 29 जून पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस अनशन की अनुमति देता है या पीड़ित पिता के इस कड़े कदम के बाद सीबीआई जांच में कोई तेजी आती है.


 

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