हरियाणा के जाने-माने सिंगर मासूम शर्मा इन दिनों अपनी बेबाकी को लेकर चर्चा में हैं. 'हरियाणा तक' को दिए एक इंटरव्यू में मासूम शर्मा ने राजनीति, नेताओं और अपनी निजी लाइफ से जुड़े कई ऐसे राज खोले हैं, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान है. मासूम शर्मा ने न सिर्फ अपने पॉलिटिकल कनेक्शन के बारे में बात की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे वह राजनीति में आते-आते रह गए.
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बीजेपी से मिलने वाला था टिकट, यूं बिगड़ा समीकरण
इंटरव्यू के दौरान जब मासूम शर्मा से उनके पॉलिटिकल करियर और ओपी चौटाला परिवार से नजदीकियों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया, "विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से मेरे टिकट की पूरी चर्चा चल रही थी. मामला लगभग तय था, लेकिन ऐन वक्त पर कुछ ऐसे जातिगत समीकरण बने कि चीजें बदल गईं." उन्होंने बताया कि दादा गौतम के सफीदों जॉइन करने और फिर कैप्टन भाई को जुलाना भेजने की वजह से बीजेपी से उनका टिकट फाइनल नहीं हो पाया.
राहुल गांधी से मुलाकात में क्या हुई बात?
जब मासूम शर्मा से कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी मुलाकात को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान राहुल गांधी खुद उनसे मिलना चाहते थे. मासूम ने कहा, "लाड-प्यार और इज्जत देकर कोई बुलाए, तो मैं चला जाता हूं. हमारी कोई किसी से दुश्मनी नहीं है."
राहुल गांधी से हुई 5 मिनट की बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे हरियाणवी कल्चर और संगीत (वेस्टर्न या पारंपरिक) के बारे में पूछा था. यात्रा की भीड़भाड़ के कारण इससे ज्यादा लंबी बातचीत नहीं हो सकी.
दिग्विजय चौटाला से दोस्ती और राष्ट्रवाद की विचारधारा
जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला से अपनी दोस्ती पर बात करते हुए मासूम शर्मा ने बताया कि दिग्विजय उनके अच्छे दोस्त हैं और उनके कहने पर उन्होंने जेजेपी के लिए एक गाना भी गाया था. इस गाने को लेकर उन्हें बीजेपी की तरफ से फोन भी आया था, जिस पर मासूम ने साफ कह दिया कि वह एक कलाकार हैं और गाना गाना कोई जुर्म नहीं है.
अपनी राजनीतिक सोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी विचारधारा शुरू से राष्ट्रवाद की रही है क्योंकि मैं आर्य समाज से जुड़ा रहा हूं. हालांकि, राजनीति में आपको अपने विचारों को दबाना पड़ता है, नहीं तो आप वहां कामयाब नहीं हो सकते."
कलाकारों की बदहाली पर उठाए सवाल
मासूम शर्मा ने हरियाणा सरकार की फिल्म पॉलिसी की तारीफ तो की लेकिन कलाकारों तक इसका लाभ न पहुंचने पर चिंता भी जताई. उन्होंने कहा कि सरकार योजनाएं तो बहुत लाती है, लेकिन बिचौलिए और अफसरशाही के कारण जमीनी और लोक कलाकारों (फोक आर्टिस्ट्स) तक उनका हक और पूरा पैसा नहीं पहुंच पाता.
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