'हिमालय से भी बड़ा रहा यह एक साल...', पहलगाम हमले में शहीद नेवी ऑफिसर विनय नरवाल के पिता ने बताया कैसे कट रहा है एक-एक पल!

Rajesh Narwal on Pahalgam attack anniversary: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर शहीद विनय नरवाल के पिता का दर्द छलक पड़ा. 'हिमालय से भी बड़ा रहा यह एक साल' कहते हुए उन्होंने बेटे की शादी के कुछ दिनों बाद हुए इस हमले की दर्दनाक यादें साझा कीं, परिवार की मानसिक पीड़ा को बयान किया और आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई. जानें पूरी कहानी.

Rajesh Narwal on Pahalgam Attack Anniversary
Rajesh Narwal on Pahalgam Attack Anniversary

कमलदीप

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले को आज यानी 22 अप्रैल को एक साल पूरा हो गया है. इस हमले में करनाल के रहने वाले भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने भी अपनी जान गंवाई थी. हमले की पहली बरसी पर उनके पिता राजेश नरवाल ने बताया कि पिछला एक साल उनके परिवार के लिए किसी पहाड़ को ढोने जैसा रहा है. साथ ही उन्होंने कैसे बिताया एक साल और सरकार की कार्रवाई पर उन्होंने क्या-कुछ कहा.

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खुशियों के बीच आया मातम

राजेश नरवाल ने भावुक होते हुए बताया कि हमले से ठीक पहले परिवार में खुशियों का माहौल था. 16 अप्रैल को विनय की शादी थी और 19 अप्रैल को रिसेप्शन. उन्होंने कहा, '19 तारीख को मेरे जेहन में वही बातें घूम रही हैं कि पिछले साल इस वक्त हम क्या तैयारियां कर रहे थे. शादी की खुशियों को 72 घंटे भी नहीं बीते थे कि 22 अप्रैल को हमारे ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.' 

'दुख का बोझ जानवर भी गिरा देता है, पर यह ग्रीफ पीछा नहीं छोड़ती'

अपने दर्द को बयां करते हुए राजेश नरवाल ने कहा, '54 साल की जिंदगी तो पलक झपकते बीत गई, लेकिन यह एक साल हिमालय से भी बड़ा रहा है. दुख का बोझ ऐसा होता है जिसे जानवर भी थककर गिरा देता है, लेकिन यह मानसिक पीड़ा सोते-जागते पीछा नहीं छोड़ती.' उन्होंने बताया कि विनय के दादा-दादी, जो 80 की उम्र में हैं, उनके लिए यह दुख सहना और भी मुश्किल है क्योंकि विनय उनके बहुत करीब था.

सरकार की कार्रवाई पर क्या बोले?

आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार और सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव पर राजेश नरवाल ने कहा कि कार्रवाई सही हुई है, लेकिन 'संतुष्टि' शब्द उनके लिए बेईमानी है. उन्होंने कहा, 'संतुष्टि तब होगी जब हमारा देश आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा और लोग बेखौफ घूम सकेंगे. पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है और पूरी दुनिया को मिलकर इसे खत्म करना चाहिए.' 

पांच पीढ़ियों की सैन्य विरासत

विनय नरवाल के रगों में देशभक्ति का जज्बा उनके डीएनए में था. उनके परिवार की पांच पीढ़ियां सेना और पुलिस में रही हैं. विनय के पिता ने बताया, 'विनय ने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की थी, लेकिन वह हमेशा कहता था कि मुझे प्राइवेट जॉब नहीं करनी, मुझे क्लास-1 ऑफिसर बनकर डिफेंस में जाना है. उसने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया.'

युवाओं के लिए संदेश

अपने बेटे को खोने के बावजूद राजेश नरवाल ने देश के युवाओं से अपील की है कि वे सेना में भर्ती हों. उन्होंने कहा, 'ऐसी घटनाओं से डरना नहीं है, बल्कि उनका सामना करना है. डिफेंस में जाना गर्व की बात है. मैं करनाल और पूरे देश के बच्चों से कहता हूं कि वे खुद को मानसिक रूप से तैयार करें और देश की सेवा का सपना देखें.'

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पहलगाम आतंकी हमले के एक साल पूरे होने के बाद कैसा है वहां का माहौल? ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए बदलाव से लेकर सबकुछ

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