दक्षिण कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हुआ है. इस एक साल में पहलगाम और यहां के पर्यटन उद्योग ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. हमले के बाद बदले सुरक्षा प्रोटोकॉल और बंदिशों के बीच, अब धीरे-धीरे रौनक लौटने की कोशिश कर रही है, लेकिन पर्यटकों की संख्या अब भी हमले से पहले वाले दौर के मुकाबले काफी कम है. आइए जानते है कि एक साल में वहां क्या-कुछ बदला और अभी कैसा है वहां का माहौल.
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सुरक्षा का नया प्रोटोकॉल और पाबंदियां
पिछले साल पहलगाम के 'बायसरन' इलाके में हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया गया है. पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों ने मिलकर पर्यटन स्थलों के लिए एक नया 'सिक्योरिटी प्लान' तैयार किया है. हालांकि घाटी के कई पर्यटन स्थल फिर से खोल दिए गए हैं, लेकिन 'बायसरन' जहां हमला हुआ था वो सुरक्षा कारणों से अब भी बंद है. प्रशासन का कहना है कि वे पिछली गलतियों से सीख लेकर सुरक्षा को और पुख्ता कर रहे हैं.
पर्यटकों की वापसी: धीमी शुरुआत
हमले के एक साल बाद, पहलगाम की वादियों में वसंत की खूबसूरती तो बिखरी है, लेकिन पर्यटकों का वह हुजूम गायब है जो पहले हुआ करता था. हमले के जख्म अभी पूरी तरह भरे नहीं हैं और लोग यहां आने से पहले दो बार सोचते हैं. इसके बावजूद, अब पर्यटक धीरे-धीरे पहलगाम पहुंचने लगे हैं. हालांकि यह संख्या पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है, पर स्थानीय कारोबारियों के लिए यह उम्मीद की एक किरण है.
पटरी पर लौटता स्थानीय व्यवसाय
हमले के बाद पहलगाम के स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर्स (घोड़े वाले, होटल कर्मी और गाइड) की स्थिति काफी खराब हो गई थी. कई लोगों को पूछताछ का सामना करना पड़ा और कई यहां से चले गए. अब जैसे-जैसे पर्यटक लौट रहे हैं, उनका व्यवसाय भी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है. सरकार और अन्य स्टेकहोल्डर्स की कोशिश है कि पहलगाम की 'सुरक्षित डेस्टिनेशन' वाली छवि को जल्द से जल्द बहाल किया जाए.
भविष्य की उम्मीदें
पहलगाम उस हमले के बाद हमेशा के लिए बदल चुका है, लेकिन प्रशासन को उम्मीद है कि पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था से पर्यटकों का भरोसा दोबारा लौटेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के पर्यटन सीजन में धीरे-धीरे पर्यटकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और पहलगाम एक बार फिर कश्मीर के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक बनकर उभरेगा.
विनय नरवाल का परिवार नहीं भूल पाया दर्द
पहलगाम हमले में करनाल के रहने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी मारे गए थे. विनय अपनी शादी के बाद पत्नी के साथ घूमने गए थे, तभी आतंकवादियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया. अब एक साल बाद भी विनय का परिवार यह दर्द नहीं भूल पाया है. विनय के पिता ने कहा कि आज का दिन सबसे दुखद दिन है और पिछले एक साल से वे परिवार को संभाल रहे है.
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