देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के जाने के बाद सरकारें बड़े-बड़े वादे तो कर देती हैं लेकिन समय बीतने के साथ वे वादे सिर्फ फाइलों में दबकर रह जाते हैं. ऐसा ही एक दर्दनाक मामला हरियाणा के पलवल से सामने आया है. 'ऑपरेशन सिंदूर' में वीरगति को प्राप्त हुए लांस नायक दिनेश शर्मा के शहादत के सवा साल बाद भी उनके परिवार को सरकारी वादों के पूरे होने का इंतजार है.
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शहीद के परिजन का आरोप है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद गांव पहुंचकर जो वादे किए थे, वे आज तक अधूरे हैं. स्थिति यह है कि शहीद का परिवार मुख्यमंत्री निवास, अधिकारियों और विधायकों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही.
शहादत के सवा साल बाद भी अधूरी हैं घोषणाएं
7 मई 2023 को 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पलवल के दिनेश शर्मा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे. उस समय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद शहीद के घर पहुंचे थे और बिना किसी मांग के कई घोषणाएं की थीं.
सरकार की प्रमुख घोषणाएं:
- गांव (मोहम्मदपुर) का नाम बदलकर शहीद दिनेश शर्मा के नाम पर रखना.
- गांव के प्रवेश द्वार और एक पार्क का निर्माण.
- पार्क में शहीद दिनेश शर्मा की प्रतिमा स्थापित करना.
- स्थानीय सरकारी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर करना.
- लेकिन सवा साल बीत जाने के बाद भी इनमें से एक भी काम पूरा नहीं हो सका है.
शहीद की पत्नी का छलका दर्द
शहीद दिनेश शर्मा की पत्नी सीमा ने बताया कि स्मारक का काम कुछ दिन के लिए शुरू जरूर हुआ था, लेकिन उसे बीच में ही रोक दिया गया. उन्होंने कहा, "स्मारक की चारदीवारी भी नहीं बनाई गई है, जिससे वहां आवारा पशु घूमते रहते हैं. हमें डर लगा रहता है कि कहीं कोई पशु प्रतिमा को नुकसान न पहुंचा दे या उसे खंडित न कर दे. हम दफ्तरों के चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिलता."
स्वतंत्रता दिवस का सम्मान ठुकराया
शहीद के पिता दयाचंद शर्मा ने भी सरकार और स्थानीय प्रशासन के रवैये पर कड़ा रोष जताया. उन्होंने बताया कि वे पलवल के डीसी, स्थानीय विधायक हरेंद्र सिंह और राज्य के कई मंत्रियों से गुहार लगा चुके हैं. यहाँ तक कि वे तीन बार हरियाणा भवन भी गए, लेकिन मुख्यमंत्री से मुलाकात या कोई कार्रवाई नहीं हुई.
पिता दयाचंद शर्मा ने बताया:
"7 मई को जब मेरे बेटे की बरसी थी, तब मैं खुद कार्ड देने गया था. लेकिन ना कोई मंत्री आया, ना विधायक और ना ही प्रशासन का कोई अधिकारी. मेरे दिल पर क्या बीती होगी, जब देश के लिए जान देने वाले बेटे की बरसी पर किसी ने एक आहुति तक नहीं डाली."
प्रशासनिक उपेक्षा से आहत होकर पिता ने 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर सरकार द्वारा दिए जाने वाले सम्मान पत्र और निमंत्रण को स्वीकार करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि जब तक उनके शहीद बेटे को किया गया वादा और सम्मान नहीं मिलता, तब तक उन्हें किसी सरकारी पुरस्कार या सम्मान की जरूरत नहीं है.
एक ही परिवार के 6 बेटे सेना में, फिर भी 'अंधेरगर्दी'
शहीद के पिता ने भावुक होते हुए बताया कि उनके परिवार का देश सेवा से गहरा नाता है. परिवार के कुल 6 बच्चे भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे, जिनमें से एक बेटा दिनेश शहीद हो गया और दो बेटे आज भी सरहद पर तैनात हैं. इसके बावजूद उन्हें अपने ही हक और मुख्यमंत्री के वादों को पूरा कराने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे शहीद के सम्मान में किए गए अपने वादों को जल्द से जल्द पूरा करें.
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