हरियाणा की राजनीति में इन दिनों एक युवा चेहरे की खूब चर्चा हो रही है. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञानचंद गुप्ता के 21 वर्षीय पोते पार्थ गुप्ता ने पंचकूला नगर निगम चुनाव के वार्ड नंबर 6 से शानदार जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ ही पार्थ पंचकूला के इतिहास में सबसे कम उम्र के पार्षद बन गए हैं. इस जीत को ज्ञानचंद गुप्ता द्वारा अपने पोते की सफल 'राजनीतिक लॉन्चिंग' के रूप में देखा जा रहा है.
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चुनाव में बहाया पसीना
खास बात यह रही कि इस चुनाव में ज्ञानचंद गुप्ता को खुद जमीन पर उतरकर घर-घर जाकर वोट मांगने पड़े. पिछले 11 वर्षों से पंचकूला की राजनीति में 'सुपर पावर' माने जाने वाले गुप्ता पहली बार गली-गली हाथ जोड़ते नजर आए. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस चुनाव ने उन्हें सबको साथ लेकर चलने का सबक भी सिखाया है.
पार्थ गुप्ता का विजन
विदेश से पढ़ाई पूरी कर लौटे पार्थ गुप्ता ने जीत के बाद अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि एक युवा होने के नाते वह युवाओं की समस्याओं को बेहतर समझते है. पार्थ ने अपने वार्ड के लिए कई महत्वपूर्ण वादे किए हैं. जैसे वार्ड के कुछ इलाकों में जलभराव के मुद्दे को जल्द सुलझाना. सुरक्षा गेट लगवाना, बाउंड्री वॉल बनाना और क्षेत्र को आवारा पशु मुक्त करना. सड़कों का निर्माण, ट्रैफिक लाइट लगवाना और स्पीड ब्रेकर की व्यवस्था करना. इसके अलावा, स्थानीय वेंडर्स को लाइसेंस दिलवाना ताकि वे व्यवस्थित रूप से काम कर सकें.
क्या रिटायर होंगे ज्ञानचंद गुप्ता?
पार्थ की राजनीति में एंट्री के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ज्ञानचंद गुप्ता अब सक्रिय राजनीति से रिटायर होकर अपनी विरासत पोते को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं.
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