हरियाणा में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है, खासकर हिसार की उकलाना मंडी सीट पर. यहां एक 23 साल की निर्दलीय लड़की रीमा सोनी ने भारतीय जनता पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार निकिता गोयल को करारी शिकस्त देकर इतिहास रच दिया है. जहां एक तरफ पूरे प्रदेश में बीजेपी की लहर दिख रही थी, वहीं उकलाना में रीमा सोनी की इस जीत ने बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों के गणित बिगाड़ दिए हैं.
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रीमा सोनी की जीत की रणनीति
रीमा सोनी की इस बड़ी जीत के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं. सबसे बड़ी वजह विपक्ष का एकजुट होना रहा. हालांकि रीमा निर्दलीय चुनाव लड़ रही थीं, लेकिन उन्हें कांग्रेस और इनेलो का खुला समर्थन प्राप्त था. कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल और कुमारी शैलजा जैसे बड़े नेताओं ने रीमा के लिए जमीन पर उतरकर प्रचार किया. साथ ही, रीमा सोनी की अपनी साफ-सुथरी छवि और सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने युवा वोटरों को अपनी ओर खींच लिया.
भाजपा की हार के पीछे की वजहें
भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल, वरिष्ठ नेता श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधू हैं. रिपोर्ट के अनुसार, उकलाना में बनिया समाज और व्यापारी वर्ग की श्रीनिवास गोयल के प्रति नाराजगी भाजपा की हार का मुख्य कारण बनी. समाज का वोट बैंक टूटने के कारण निकिता गोयल केवल 2 वार्डों में ही बढ़त बना सकीं, जबकि रीमा सोनी ने 16 में से 14 वार्डों में जीत दर्ज की.
शानदार मार्जिन से जीत
रीमा सोनी ने करीब 2806 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की है. वोटों की गिनती के दौरान माहौल ऐसा था कि दो राउंड के बाद ही बीजेपी खेमे में सन्नाटा पसर गया और उम्मीदवार काउंटिंग सेंटर छोड़कर चले गए. 23 साल की उम्र में रीमा सोनी की इस शानदार जीत के बाद उनकी खूब चर्चा है.
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