हरियाणा के रोहतक स्थित मशहूर डी-पार्क मार्केट में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. इस हादसे में तीन लोगों की असमय मौत हो गई और करीब 10 से अधिक दुकानें जलकर पूरी तरह खाक हो गईं. इस संकट की घड़ी में पीड़ितों का दर्द बांटने और स्थिति का जायजा लेने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा घटना स्थल पर पहुंचे. वहां का मंजर देखकर वह भावुक हो गए और प्रशासनिक स्तर पर दिखी ढिलाई को लेकर अधिकारियों पर उनका गुस्सा फूट पड़ा.
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जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रभावित दुकानदारों से बात कर रहे थे, तभी मौके पर मौजूद एक जांच अधिकारी के ढुलमुल रवैये को देखकर वह खुद को रोक नहीं पाए. हुड्डा ने अधिकारी को सख्त लहजे में डांटते हुए हरियाणवी अंदाज में कहा, "सरकार का ठेकेदार मत बणै, सरकार नै तै मैं आप्पै देख ल्यूंगा, थाम ठीक रिपोर्ट बणाओ." उन्होंने साफ किया कि अधिकारी का काम सरकार का बचाव करना नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और व्यापारियों के नुकसान की सही रिपोर्ट तैयार करना है.
फायर ब्रिगेड की देरी और खाली पदों पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस भीषण हादसे के लिए सीधे तौर पर फायर फाइटिंग सिस्टम की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन भले ही समय पर पहुंच गया हो, लेकिन दमकल विभाग की गाड़ियां करीब एक घंटे की देरी से आईं. अगर दमकल की गाड़ियां वक्त पर पहुंच जातीं, तो आग को फैलने से रोका जा सकता था और नुकसान काफी कम होता.
हुड्डा ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दमकल विभाग में 50 फीसदी से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. पिछले ढाई साल से युवाओं की भर्तियां अटकी हुई हैं. इसके अलावा जो गाड़ियां मौके पर भेजी गईं, उनमें से कुछ तकनीकी खराबी के कारण समय पर चालू ही नहीं हो सकीं. उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी दमकल गाड़ियों की जांच करवाए और विभाग में खाली पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरे.
मुआवजे की राशि को बताया नाकाफी
हरियाणा सरकार द्वारा घोषित 10 लाख रुपये की सहायता राशि पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि इस आगजनी में कई छोटे-बड़े व्यापारियों का करोड़ों रुपये का सामान जल गया है, कई इमारतें 100 फीसदी जमींदोज हो चुकी हैं. ऐसे में सिर्फ कुछ लाख रुपये की मदद ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. हुड्डा ने मांग की कि सरकार महंगाई के इस दौर में मुआवजे का दायरा बढ़ाए और प्रभावित दुकानदारों को उनके वास्तविक नुकसान के आकलन के आधार पर पूरा मुआवजा दे, ताकि वे अपना कारोबार दोबारा खड़ा कर सकें.
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