सोनीपत : 5100 देकर वीडियो कॉल पर कराया था पिता का अंतिम संस्कार, अब तेरहवीं पर भी नहीं आईं बेटियां, समाज के लोगों ने निभाईं रस्में

पवन राठी

• 06:23 PM • 16 Aug 2026

Sonipat Shivcharan Ramratan Gupta Funeral: शिवचरण रामरतन गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां तेरहवीं में भी शामिल नहीं हुईं. ऐसे में सोनीपत के लोगों और सामाजिक संस्थाओं ने आगे बढ़कर उनकी अंतिम रस्में पूरी कराईं. गीता मंदिर में हवन-यज्ञ और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ. इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने एक बार फिर रिश्तों और इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए.

अंतिम संस्कार के बाद अब पिता की तेरहवीं में भी नहीं आईं बेटियांअंतिम संस्कार के बाद अब पिता की तेरहवीं में भी नहीं आईं बेटियां
अंतिम संस्कार के बाद अब पिता की तेरहवीं में भी नहीं आईं बेटियां
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 Sonipat Daughters Video Call Funeral Controversy: हरियाणा के सोनीपत में शिवचरण रामरतन गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां तेरहवीं की रस्म में भी शामिल नहीं हुईं. बता दें कि कुछ दिन पहले ही बेटियों ने 5,100 रुपये देकर वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता का अंतिम संस्कार करवाया था. अब तेरहवीं के मौके पर भी बेटियों के नहीं पहुंचने के बाद शहर की सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय लोगों ने सभी जरुरी रस्में निभाई . उन्होंने गीता मंदिर में श्रद्धांजलि सभा और तेरहवीं की रस्म पूरी कराई. इस दौरान हवन-यज्ञ किया गया, लोगों ने तस्वीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी और शामिल लोगों को प्रसाद बांटा गया.

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गीता मंदिर में हुआ हवन यज्ञ, उमड़ा पूरा शहर

शिवचरण रामरतन गुप्ता की मौत के 13वें दिन सोनीपत के गीता मंदिर में सर्व समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से हवन यज्ञ और शांति पाठ का आयोजन किया गया. इस श्रद्धांजलि सभा में शहर के वरिष्ठ नागरिक, समाजसेवी, नेता और डॉक्टर्स बड़ी संख्या में पहुंचे और दिवंगत शिवचरण की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

महाराष्ट्र से सोनीपत वृद्धाश्रम पहुंचे थे शिवचरण

जानकारी के मुताबिक, शिवचरण रामरतन गुप्ता महाराष्ट्र में रहते थे और नेपाल में उनका कपड़ों का बड़ा कारोबार था. उनकी तीन बेटियां थीं. बेटियों से अलग होकर वे अपनी पत्नी के साथ सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में आकर रहने लगे थे. वृद्धाश्रम में ही उनकी पत्नी का निधन हो गया था, जिसके बाद वे दूसरे आश्रम में चले गए थे. वहीं उनका भी निधन हो गया. जब आश्रम संचालकों ने उनकी बेटियों से संपर्क किया था, तो उन्होंने आने से इनकार कर दिया था और 5,100 रुपये भेजकर ऑनलाइन वीडियो कॉल पर ही अंतिम संस्कार करने को कहा था.

समाजसेवियों का छलका दर्द: "सुरक्षा का आश्वासन दिया था फिर भी नहीं आईं"

तेरहवीं कार्यक्रम में पहुंचे समाजसेवियों ने कहा कि बेटियों को हर तरह की सुरक्षा और सहयोग का आश्वासन दिया गया था, इसके बावजूद वे तेरहवीं में भी शामिल नहीं हुईं. हालांकि, समाज के लोगों ने कहा कि भले ही खून के रिश्ते पीछे हट गए हों, लेकिन सोनीपत शहर ने एक परिवार की तरह अपना धर्म और सामाजिक दायित्व निभाया है.

घटना का बड़ा सामाजिक असर: वृद्धाश्रम से घर लौटे बुजुर्ग

इस घटना के नेशनल मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद एक बड़ा सकारात्मक असर भी देखने को मिला है. सोनीपत के वृद्धाश्रम संचालकों और समाजसेवियों ने बताया कि इस खबर के वायरल होने के बाद समाज में जागरूकता आई है. सोनीपत के एक वृद्धाश्रम से एक बुजुर्ग दंपत्ति को उनके बच्चे वापस अपने घर ले गए हैं. इसके अलावा, अन्य बुजुर्गों के मन से भी अपने उत्पीड़न को लेकर चुप्पी तोड़ने का डर दूर हुआ है.


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