'चूरमा खिलाकर भेजा था, अब चूरमा खिलाकर ही स्वागत करूंगी'... बेटे सुजीत कलकल के गोल्ड जीतने पर मां की आंखों में छलके आंसू! देखें VIDEO

Sujit Kalkal Asian Games Gold News: एशियन गेम्स 2026 में फ्रीस्टाइल कुश्ती (65 kg) में चरखी दादरी के सुजीत कलकल ने कड़े मुकाबले में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता. 0-2 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी करते हुए 10-9 से जीत दर्ज की. सुजीत की इस बड़ी कामयाबी पर पैतृक गांव इमललोटा में जश्न का माहौल है.

 एशियन गेम्स में सुजीत के गोल्ड जीतने पर मां की आंखों में छलके आंसू!
एशियन गेम्स में सुजीत के गोल्ड जीतने पर मां की आंखों में छलके आंसू!
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Sujit Kalkal Asian Games Gold News: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने अपनी कुश्ती से पूरे देश का दिल जीत लिया है. फ्रीस्टाइल कुश्ती के 65 किलोग्राम भार वर्ग में चरखी दादरी के गांव इमललोटा निवासी सुजीत कलकल ने ताजिकिस्तान के स्टार रेसलर अब्दुलमजीद कुदीव को रोमांचक मुकाबले में 10-9 से हराकर भारत की झोली में 15वां गोल्ड मेडल डाला. यह इस एशियन गेम्स में कुश्ती प्रतियोगिता में भारत का पहला गोल्ड मेडल है.

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0-2 से पिछड़ने के बाद की करिश्माई वापसी

फाइनल मुकाबला सुजीत के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था. खेल के पहले हाफ में प्रतिद्वंद्वी पहलवान ने सुजीत पर दबाव बनाते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी. लेकिन दूसरे हाफ के आखिरी 90 सेकेंड में सुजीत कलकल ने अद्भुत दांव-पेच और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए बाजी पलट दी और 10-9 के अंतर से शानदार जीत हासिल कर भारत का तिरंगा फहरा दिया.

'चुरमा खिलाकर भेजा था, चुरमे से ही स्वागत करूंगी'

सुजीत की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके गांव इमललोटा में खुशी की लहर दौड़ गई. लोग सड़कों पर उतर आए और आतिशबाजी कर ढोल-नगाड़ों पर थिरकने लगे. सुजीत की मां मंजीत ने भावुक होते हुए कहा, "मेरे बेटे ने मेरे दूध की लाज रख ली. जब वह घर से गया था तो चुरमा खाकर गया था और वादा करके गया था कि मां गोल्ड मेडल ही लेकर आऊंगा. अब जब वह लौटेगा तो हम एयरपोर्ट पर चुरमा लेकर जाएंगे और चुरमा खिलाकर ही उसका स्वागत करेंगे."

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12वीं में आए थे 90% मार्क्स, लेकिन चुना अखाड़ा

23 वर्षीय सुजीत कलकल बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थे. 12वीं की परीक्षा में उनके 90% अंक आए थे. परिजनों को लगा था कि सुजीत डॉक्टर या इंजीनियर की तैयारी करेगा, लेकिन सुजीत ने पहलवानी को ही अपना करियर चुना. परिजनों ने भी बेटे के सपने का पूरा समर्थन किया. सुजीत इससे पहले अंडर-23 विश्व चैंपियन और एशियाई चैंपियन भी रह चुके हैं.

पिता बोले- 'अब अगला लक्ष्य ओलंपिक गोल्ड'

सुजीत के पिता दयानंद कलकल ने गर्व जताते हुए कहा कि उनके बेटे ने देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने बताया कि सुजीत 2025 के बाद से एक भी मुकाबला नहीं हारा है. सुजीत का अगला मुख्य लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.

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