हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने एक बेहद जटिल और खतरनाक 'कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू' (CSAR) ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इस ऑपरेशन के जरिए अमेरिका ने ईरान के कब्जे वाले या दुश्मन के प्रभाव वाले क्षेत्र से अपने दूसरे एयरमैन (सैनिक) को सुरक्षित निकाल लिया. रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल यश मोर ने 'हरियाणा तक' के साथ खास बातचीत में इस ऑपरेशन की बारीकियों और इसकी सफलता के पीछे की तकनीक को विस्तार से समझाया है.
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क्या होता है CSAR ऑपरेशन?
मेजर जनरल यश मोर के अनुसार, CSAR यानी कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन किसी भी सेना के सबसे कठिन मिशनों में से एक माना जाता है. अमेरिकी सेना का एक मूल मंत्र है- "नो मैन विल बी लेफ्ट बिहाइंड" (किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा). इसी मंत्र को सिद्ध करने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया.
कैसे बचाए गए दोनों पायलट?
यह पूरा मामला एक F-15E फाइटर जेट के क्रैश होने या हिट होने से जुड़ा है. इस विमान में दो लोग सवार थे- एक पायलट और दूसरा वेपन्स ऑपरेटर.
- पहला रेस्क्यू: विमान गिरने के तुरंत बाद पहले सैनिक को रेस्क्यू कर लिया गया था.
- दूसरा रेस्क्यू: दूसरे सैनिक (जो कर्नल रैंक के अधिकारी बताए जा रहे हैं) को निकालने में करीब 48 घंटे लगे.
पायलट के पास क्या होता है 'सर्वाइवल किट'?
मेजर जनरल मोर ने बताया कि जब एक फाइटर पायलट इजेक्ट करता है, तो उसके पास खुद को बचाने के लिए कई चीजें होती हैं:
- पर्सनल वेपन: आत्मरक्षा के लिए एक छोटा हथियार.
- जीपीएस और कोडेड बीकन्स: अपनी सटीक लोकेशन भेजने के लिए.
- इमरजेंसी राशन और पानी: जीवित रहने के लिए खाना और पानी साफ करने वाली टैबलेट्स.
- एस्केप एंड इवेजन ट्रेनिंग: पायलटों को सिखाया जाता है कि दुश्मन के इलाके में गिरने पर सबसे पहले ऊंचे स्थान (High Ground) पर पहुंचें ताकि सैटेलाइट उन्हें आसानी से ट्रैक कर सके और दुश्मन उन तक जल्दी न पहुंच पाए
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