आजकल बाजार में हाइब्रिड और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) बीजों की भरमार है. ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि जो खाना हम खा रहे हैं, वह सेहत के लिए कितना सुरक्षित है? क्या हमारे बुजुर्गों का पसंदीदा बाजरा, ज्वार और रागी आज भी उतने ही फायदेमंद हैं? इन तमाम जरूरी सवालों के जवाब देश के जाने-माने डॉक्टर एसके सरीन (Dr. SK Sarin) ने दिए हैं. आइए जानते हैं कि खानपान को लेकर उन्होंने क्या बड़े खुलासे किए हैं.
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हाइब्रिड और जीएम (GM) बीजों पर क्या बोले डॉक्टर सरीन?
इंटरव्यू के दौरान जब डॉक्टर सरीन से पूछा गया कि क्या आज का हाइब्रिड बाजरा या अन्य अनाज सेहत के लिए नुकसानदेह हैं? इस पर डॉक्टर सरीन ने कहा कि जेनेटिकली मॉडिफाइड या हाइब्रिड चीजें असल में खराब नहीं हो सकतीं. कोई भी बीज बहुत सोच-समझकर, लंबे रिसर्च और कड़े अप्रूवल के बाद ही मार्केट में आता है. फसल को अधिक उपजाऊ और सीज़न के अनुकूल बनाने के लिए बदलाव जरूरी हैं, इसलिए हाइब्रिड अनाज को लेकर मन में कोई शक नहीं होना चाहिए.
वजन घटाने और शुगर कंट्रोल करने में बाजरा-ज्वार का जादू
डॉक्टर सरीन ने बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों (Millets) को सुपरफूड बताया. उन्होंने इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाते हुए कहा कि इनका 'ग्लाइसेमिक इंडेक्स' (Glycemic Index) बेहद कम होता है.
फायदा: जब आप गेहूं की रोटी, मक्का या चीनी खाते हैं, तो ब्लड शुगर तेजी से स्पाइक करता है. लेकिन बाजरा या ज्वार खाने के बाद शरीर में शुगर बहुत धीरे-धीरे अब्सॉर्ब (सोखना) होती है.
असर: इसे खाने के बाद करीब 3 घंटे तक शुगर धीरे-धीरे रिलीज होती है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती. यह वजन घटाने और भूख को कंट्रोल करने में रामबाण है. डॉक्टर सरीन ने बताया कि बाजार में अब ऐसा बाजरा भी मौजूद है जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सिर्फ 31 है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है. दूसरी तरफ, मक्का (Corn) और कॉर्न सिरप जैसी चीजें शुगर को तुरंत बढ़ाती हैं, जिससे बचना चाहिए.
गांव से शहर आने पर क्यों नहीं पचता पुराना खाना?
एक दिलचस्प सवाल पर कि 'गांव में रहने पर बाजरे की कई रोटियां पच जाती थीं, लेकिन शहर आने के बाद अब गांव जाने पर वह खाना हजम क्यों नहीं होता?' डॉक्टर सरीन ने इसका चौंकाने वाला कारण बताया.
उन्होंने कहा कि हमारी आंतों (Intestine) में करीब 1.5 किलो अच्छे बैक्टीरिया होते हैं. जब हम अपना लाइफस्टाइल और खानपान बदलकर रोज पराठे या फास्ट फूड खाने लगते हैं, तो आंतों के बैक्टीरिया भी बदल जाते हैं. ऐसे में जब हम लंबे समय बाद वापस अपना पुराना पारंपरिक खाना खाते हैं, तो आंतों के बैक्टीरिया के लिए वह एक 'विदेशी भोजन' (Foreign Food) जैसा हो जाता है. यही कारण है कि खाना पचाने में दिक्कत होती है. इसलिए अपनी डाइट को बार-बार और अचानक नहीं बदलना चाहिए.
मोटापा फैट से नहीं, शुगर से बढ़ता है
बढ़ती परचेसिंग पावर के साथ विदेशी फल (जैसे ड्रैगन फ्रूट) या नई चीजें ट्राई करने पर डॉक्टर सरीन ने सलाह दी कि आप नया जरूर खाएं, लेकिन दो बातों का ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि लोग 'फैट' (Fat) को बदनाम करते हैं, लेकिन असल में वजन फैट से नहीं बल्कि 'शुगर और कार्बोहाइड्रेट' से बढ़ता है. शुगर शरीर में जाकर सीधे फैट के रूप में जमा हो जाती है. अगर आप फिट रहना चाहते हैं या वजन घटाना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में शुगर की मात्रा को घटाकर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत तक ले आएं.
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