'एक पत्नी के कई पति...' वाले बयान पर चौतरफा घिरे राजकुमार भाटी, अब सपा नेता ने खुद खोला पूरा राज

सपा नेता राजकुमार भाटी ने चौधरी टिकैत की पुण्यतिथि पर जाट और गुर्जर समाज के इतिहास व एकता का हवाला देते हुए एक विवादित टिप्पणी कर दी थी. चौतरफा विरोध और सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद, उन्होंने सच्चे मन से माफी मांगते हुए साफ किया कि उनकी नियत गलत नहीं थी और वे केवल पुरानी कुरीतियों के खात्मे की बात कर रहे थे.

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Rajkumar Bhati

न्यूज तक डेस्क

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रखर वक्ता राजकुमार भाटी अपने एक हालिया बयान को लेकर भारी विवादों में घिर गए हैं. चौधरी चरण सिंह के सहयोगी रहे दिवंगत किसान नेता बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में उनके द्वारा जाट और गुर्जर समाज को लेकर दिए गए एक बयान पर बवाल मच गया. चौतरफा विरोध और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होने के बाद अब राजकुमार भाटी ने एक वीडियो जारी कर सच्चे मन से माफी मांगी है और अपनी पूरी बात का संदर्भ समझाया है.

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क्या था पूरा मामला और राजकुमार भाटी का बयान?

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय जाट महासभा और किसान बिरादरी के एक बड़े कार्यक्रम में देश के कई दिग्गज नेता मौजूद थे. इसी मंच से बोलते हुए राजकुमार भाटी के मुंह से निकल गया कि "गुर्जर और जाटों में यह होता है कि एक पत्नी के कई पति हों...". इस बयान का छोटा सा हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद दोनों ही समाजों के लोगों ने भाटी का कड़ा विरोध शुरू कर दिया.

माफी मांगते हुए राजकुमार भाटी ने दी ये सफाई

बढ़ते विवाद को देखते हुए राजकुमार भाटी ने सामने आकर कहा, "मेरी बात को गलत संदर्भ में समझा गया है. मैं आज से नहीं बल्कि 1990 से हमेशा जाट, गुर्जर और यादव एकता की बात करता आया हूं. मेरा मकसद दोनों समाजों के बीच भाईचारा बढ़ाना था. मैंने महाभारत का उदाहरण देते हुए द्रौपदी के संदर्भ में वह बात कही थी, जो प्राचीन समय की थी. आज के आधुनिक संदर्भ में ऐसी कोई परंपरा समाज में नहीं है."

भाटी ने आगे कहा कि वे असल में समाज की एक अच्छी परंपरा का जिक्र कर रहे थे, जिसमें दोनों ही समाजों में विधवा महिलाओं को नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर नहीं किया जाता था, बल्कि घर में ही उन्हें ससम्मान अपनाया जाता था (जैसे भाई की मौत पर दूसरे भाई से शादी).

गालियां मिलने पर छलका दर्द, आईटी सेल पर साधा निशाना

विरोध के नाम पर मिल रही भद्दी गालियों और ट्रोलिंग पर दुख जताते हुए सपा नेता ने कहा, "बाहर का कितना ही बड़ा दुश्मन हो, आदमी सहन कर सकता है. लेकिन जब अपने ही घर के लोग, अपने ही समाज के बच्चे गाली दें तो बहुत पीड़ा होती है. अगर मेरी बात से किसी को भी ठेस पहुंची है तो मैं सच्चे मन से माफी मांगता हूँ और खेद व्यक्त करता हूँ." इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस विवाद के पीछे 1-2 प्रतिशत लोग किसी विशेष राजनीतिक दल के आईटी सेल के भी जुड़े हैं, जो जानबूझकर जाट और गुर्जर समाज में फूट डालना चाहते हैं.

किसान समाज के प्रतिनिधियों ने दिखाई दरियादिली

राजकुमार भाटी द्वारा खुले दिल से माफी मांगने के बाद हरियाणा और किसान बिरादरी के अन्य प्रतिनिधियों ने भी बड़ा दिल दिखाने की अपील की है. सहयोगियों का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का तरीका सभ्य होना चाहिए, किसी के परिवार या बच्चों को गाली देना गलत है. भाटी जी के माफी मांगने के बाद अब इस पूरे विवाद को यहीं खत्म कर आपसी भाईचारे को मजबूत किया जाना चाहिए.

 

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