युवाओं और Gen-Z द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया टिप्पणी को लेकर सियासी और सामाजिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने पीएम मोदी के इस बयान पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर युवाओं की मानसिकता को समझने और उन्हें ज्ञान देने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनने की सलाह दी है.
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योगेंद्र यादव ने कहा कि जब 20 से 25 साल के नवयुवकों और युवतियों को 'भटके हुए बच्चे' या 'गुमराह' कहकर संबोधित किया जाता है, तो इससे युवाओं के बीच भारी नाराजगी पैदा होती है. उन्होंने कहा कि युवाओं को नीचा दिखाना या उन्हें अबोध बालक समझना बंद करना चाहिए. सरकार को यह समझने की जरूरत है कि आज की पीढ़ी जागरूक है और अपने अधिकारों के साथ-साथ समाज की वास्तविकताओं से भली-भांति परिचित है.
पीएम मोदी के भाषण का संदर्भ देते हुए योगेंद्र यादव ने दो प्रमुख अंग्रेजी शब्दों 'इन्फेंटलाइजेशन' (युवाओं को बच्चा मान लेना) और 'मैन्सप्लेनिंग' (पुरुष प्रधान मानसिकता से ज्ञान देना) का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग महिलाओं को संस्कारों और आचरण की सीख देते हैं, तो महिलाओं को यह साफ दिखता है कि किस तरह के दागदार चरित्र वाले नेताओं को राजनीतिक संरक्षण और कैबिनेट में जगह दी गई है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री को महिलाओं पर इस तरह के आक्षेप लगाने से बचना चाहिए.
योगेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना प्रसिद्ध कार्यक्रम 'मन की बात' बंद करके 'यूथ की बात' शुरू करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार युवाओं की असली समस्याओं, उनकी रोजगार की जरूरतों और उनकी सोच को ईमानदारी से सुनेगी, तो उसे समाज के वास्तविक आक्रोश का अंदाजा हो सकेगा.
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