Yuvraj Manchanda Murder Case: गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित अडानी रियलिटी कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम बातें सामने आ रही हैं. पुलिस जांच और पूर्व सहकर्मियों के दावों के मुताबिक, इस मामले की मुख्य आरोपी आन्या वत्स पर पहले भी ठगी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लग चुके हैं. पैसों के विवाद में युवराज की हत्या के आरोपों के बीच अब आन्या से जुड़े पुराने मामलों और उसके कथित लेन-देन की भी जांच की जा रही है.
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रेडिट पोस्ट से सामने आई असलियत
मामले में नया मोड़ तब आया जब युवराज के साथ काम कर चुके एक पूर्व सहकर्मी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर 'नैरो पपाया' अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की. पोस्ट में दावा किया गया कि आन्या को अपने साथियों से पैसे उधार लेने की आदत थी. वह हमेशा अपनी मां के बीमार होने का झूठा बहाना बनाकर लोगों से पैसे ऐंठती थी. जब भी कोई अपना पैसा वापस मांगता, तो वह फर्जी या असली इनकम टैक्स अधिकारियों से फोन करवाकर उन्हें धमकाती थी.
शादी के लिए वापस मांगे थे उधारी के पैसे
मृतक युवराज सिंह मनचंदा की इसी साल शादी होने वाली थी. 6 सितंबर को वह अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर मार्केट में शादी की खरीदारी करने गया था. शाम करीब 4 बजे उसने बहन को बताया कि उसकी गुरुग्राम में एक मीटिंग है और वह रात 10 बजे तक लौट आएगा. युवराज आन्या से अपने दिए हुए पैसे वापस मांगने गया था, जो उसने शादी की तैयारियों के लिए मांगे थे. इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और आन्या ने अपने लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा के साथ मिलकर युवराज की हत्या कर दी.
7 घंटे तक कार में लाश लेकर घूमते रहे कातिल
हत्या के बाद आरोपी घबरा गए और युवराज के शव को अपनी कार में रखकर करीब 7 घंटे तक ठिकाने लगाने की जगह तलाशते रहे. जब कोई सुरक्षित जगह नहीं मिली, तो उन्होंने शव को सेक्टर 70 स्थित बादशाहपुर के नाले में फेंक दिया और उत्तराखंड फरार हो गए. पुलिस ने 10 सितंबर को नाले से लावारिस शव बरामद किया था और पहचान न होने पर 3 दिन बाद अंतिम संस्कार कर दिया था. 18 सितंबर को पुलिस ने मामले का पर्दाफाश करते हुए आन्या और उसके साथी संयम को उत्तराखंड के कैंची धाम से गिरफ्तार कर लिया.
सवा करोड़ की ठगी और फर्जी अफसर का खेल
पुलिस जांच में पता चला है कि आन्या वत्स के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में सवा करोड़ रुपये की ठगी का मामला पहले से दर्ज है. वह खुद को बड़ी सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से काम कराने के नाम पर पैसे ठगती थी. इसके अलावा एमआर कंपनी में काम करने के दौरान भी उसने कई ऐसे कमर्शियल प्लॉट बेच दिए थे जो बिक्री के लिए उपलब्ध ही नहीं थे.
फिलहाल आरोपी आन्या वत्स और संयम सचदेवा पुलिस रिमांड पर हैं. पूछताछ के दौरान चालाक आन्या बार-बार अपने बयान बदल रही है. कभी वह गोली मारने की बात कहती है तो कभी गला घोंटकर हत्या करने का दावा करती है. पुलिस गहनता से मामले की छानबीन कर रही है.
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