हैदराबाद के एक स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स ने अपने फ्लैगशिप मानवरहित जेट ड्रोन नाइटशेड ADX-1 का शुरुआती बड़ा परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है. कंपनी ने इस ड्रोन को चलती हुई गाड़ी की छत पर लगे प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया. नियंत्रित परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों के तहत किए गए इस टेस्ट में ड्रोन ने केवल 50 प्रतिशत थ्रॉटल यानी आधी पावर पर 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की. कंपनी का लक्ष्य इस ड्रोन की टॉप स्पीड 700 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाना है.आमतौर पर सैन्य ड्रोनों के परीक्षण के लिए लंबे रनवे या विशेष कैटापल्ट लॉन्चर की जरूरत पड़ती है. अपोलियन डायनेमिक्स ने इस परंपरा से हटकर मूविंग व्हीकल प्लेटफॉर्म से लॉन्च का तरीका अपनाया. कंपनी के अनुसार, यह परीक्षण यह साबित करने के लिए था कि आपात स्थिति में पारंपरिक एयरबेस या रनवे के बिना भी मोर्चे पर तैनात चलती गाड़ियों से ड्रोन को लॉन्च किया जा सकता है.
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नाइटशेड ADX-1 की मुख्य विशेषताएं
नाइटशेड ADX-1 को हाई-स्पीड जेट-पावर्ड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह मुख्य रूप से निगरानी या हल्के लॉजिस्टिक्स वाले ड्रोनों से अलग है. इसके प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं. लक्ष्य स्पीड 700 किलोमीटर प्रति घंटे. इस रफ्तार पर कई पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम या एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए इसे ट्रैक कर मार गिराना मुश्किल हो सकता है.
मल्टी-रोल क्षमता: इसे लोइटेरिंग म्यूनिशन (कामिकेज़ स्ट्राइक प्लेटफॉर्म) और हाई-स्पीड ड्रोन इंटरसेप्टर के रूप में डिजाइन किया जा रहा है. यह दुश्मन के ड्रोनों का पीछा कर उन्हें नष्ट करने में भी सक्षम हो सकता है.
एडवांस्ड सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर फीचर्स: रडार एमिशन डिटेक्शन तकनीक से लैस, जिससे दुश्मन के एक्टिव रडार सिग्नल्स का पता लगाया जा सकता है. समुद्री क्षेत्रों में मैरीटाइम ट्रैकिंग और जहाजों की हलचल पर नजर रखने की क्षमता भी बताई गई है.
BITS पिलानी हॉस्टल से रक्षा स्टार्टअप तक का सफर
मई 2025 में BITS पिलानी हैदराबाद कैंपस के दो बीटेक छात्रों, जयंत खत्री और सौर्य चौधरी ने अपोलियन डायनेमिक्स की शुरुआत की थी. शुरुआती प्रोटोटाइप हॉस्टल के कमरों में डिजाइन और टेस्ट किए गए. कुछ ही महीनों में कंपनी लैब प्रोटोटाइप से फील्ड डिमॉन्स्ट्रेशन तक पहुंची और भारतीय रक्षा उपयोगकर्ताओं को सिस्टम सप्लाई करने लगी. कंपनी ने अहुति एमके-II नाम का मल्टीरोटर इंटरसेप्टर ड्रोन भी विकसित किया है, जिसने 498 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड दर्ज की और भारत में रिकॉर्ड बनाया. इसके अलावा, एक मोबाइल ड्रोन लैब भी तैयार की गई है, जो युद्ध क्षेत्र के करीब जाकर ड्रोनों की मरम्मत, कस्टमाइजेशन और मैन्युफैक्चरिंग कर सकती है.
मई 2026 में स्काईरूट एयरोस्पेस, ध्रुवा स्पेस और अग्निकुल कॉस्मॉस से जुड़े दिग्गजों सहित निवेशकों ने कंपनी में 4 करोड़ रुपये का प्री-सीड निवेश किया. इससे हाई-स्पीड रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग को तेज करने में मदद मिलेगी.350 किलोमीटर प्रति घंटे का यह परीक्षण शुरुआती चरण है. कंपनी जब नाइटशेड ADX-1 को फुल थ्रॉटल मोड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के साथ आगे ले जाएगी, तो यह स्वदेशी रक्षा नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
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