Charchit Chehra: 1200 रुपए उधार लेकर खड़ा किया 3 लाख करोड़ का साम्राज्य...लेकिन आज SEBI के आरोपों ने घेरा, जानिए कौन हैं गोल्ड किंग राजेश मेहता?

Gold King Rajesh Mehta Story: 1200 रुपये उधार लेकर गोल्ड बिजनेस में कदम रखने वाले राजेश मेहता ने कैसे खड़ा किया 3 लाख करोड़ रुपये का साम्राज्य? जानिए राजेश एक्सपोर्ट, गोल्ड किंग राजेश मेहता, वैलकैम्बी रिफाइनरी, LIC निवेश और SEBI के गंभीर आरोपों से जुड़े विवाद की पूरी कहानी.

Gold King Rajesh Mehta
Gold King Rajesh Mehta

रूपक प्रियदर्शी

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Rajesh Mehta Story: देश भर में अभी एक चेहरा कि खूब चर्चा हो रही है, जिसने सोने की चमक से पूरी दुनिया को चकाचौंध कर दिया था. खदान से लेकर हाथ की अंगूठी तक, सोने के हर टुकड़े पर अपनी ब्रैंडिंग कर दी. एक बिजनेसमैन जो गोल्डन मैन कहलाया. 1200 की उधारी से 3 लाख करोड़ की सोने की लंका जैसा साम्राज्य खड़ा करने वाले हैं गोल्ड किंग राजेश मेहता. दुनिया में जब एक आदमी सोने की रिंग खरीदने के लिए हजार बार सोचता है लेकिन राजेश मेहता ने बुद्धि से दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी खड़ी कर दी लेकिन वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता. हर साल 400 टन सोना बेचते-बेचते आज देश के एक और बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड के आरोपों को लेकर कटघरे में खड़े हैं राजेश मेहता. SEBI के एक ऑर्डर ने सोने की लंका को हिलाकर रख दिया है. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे राजेश मेहता और उनके साम्राज्य की पूरी कहानी. 

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सादगी से जिंदगी जीते है राजेश मेहता

कोई भी सोचेगा कि एक तो इतना बड़ा बिजनेसमैन, ऊपर से गोल्ड का धंधा करने वाला बहुत शानो-शौकत से जीता होगा. लेकिन राजेश मेहता की प्रोफाइल इसके बिल्कुल उलट रही है. माना जाता है कि बेहद सादगी से रहते हैं, मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहते हैं. कॉर्पोरेट पार्टियों में भी नही दिखते. जैन धर्म के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए जिंदगी जीते हैं. उनकी पर्सनल इमेज ने भी राजेश एक्सपोर्ट्स को ट्रस्टेड ब्रैंड बनाने में बड़ा रोल निभाया. राजेश मेहता आज भी बेंगलुरु के पॉश इलाके में बने अपने पुश्तैनी और पारिवारिक घर में जॉइंट फैमिली के साथ रहते हैं. फोर्ब्स की रिपोर्ट के बाद पता चला कि उनके पास 300 अलग-अलग मेटल की गणेश की मूर्तियां हैं. ऐसा इसलिए जैन परिवार गणेशजी को शुभ देवता मानता है. उनके पास चार मोबाइल फोन होते हैं लेकिन केवल एक ही स्मार्ट फोन है. 

मिडिल क्लास से रिच क्लास बनने का सपना!

राजेश एक्सपोर्ट के मालिक राजेश मेहता के पिता जसवंत राय मेहता 1946 में गुजरात के मोरबी से माइग्रेट करके बैंगलोर शिफ्ट हुए थे. उन्होंने स्टोन का बिजनेस राजेश डायमंड कंपनी के साथ शुरू किया. राजेश मेहता का जन्म बैंगलोर में ही हुआ. तब मेहता परिवार बेहद साधारण मिडिल क्लास परिवार हुआ करता था. मिडिल क्लास मेहता को रिच मेहता परिवार बनाने का सपना राजेश मेहता ने देखा. चार भाइयों बिपिन, प्रशांत, राजेश और महेश में राजेश तीसरे नंबर पर हैं. ज्योतिषीय सलाह पर पिता ने तीसरे बेटे राजेश के नाम पर ही पूरे फैमिली बिजनेस का नाम 'राजेश' रखा. ज्योतिषी ने कहा था कि राजेश ही परिवार के लिए सबसे भाग्यशाली होगा. आगे चलकर सचमुच राजेश ने परिवार की तकदीर बदली.

राजेश की शादी और कारोबार में बढ़ोत्तरी

जब राजेश सोने के कारोबार में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे, तब उनकी लीना मेहता से अरेंज मैरिज हुई. लीना मेहता ने पारंपरिक पत्नी, बहू बनकर परिवार संभाला. लाइमलाइट से पूरी तरह दूर रहकर राजेश मेहता को बैक-सपोर्ट दिया. उन्हें कभी किसी बिजनेस मैगजीन या पब्लिक इवेंट में नहीं देखा गया. राजेश मेहता के पिता जसवंतराय ज्योतिष और पारिवारिक भाग्य पर गहरा विश्वास रखते थे. शादी के बाद जब राजेश मेहता के काम में तेजी आई, तो परिवार में इस बात को लेकर गहरा विश्वास बन गया कि लीना मेहता का घर में आना और तीसरे बेटे राजेश का भाग्य मिलना ही परिवार की  कंपनी की असल तरक्की की वजह बना. 

राजेश के बड़े बेटे सिद्धार्थ मेहता ने एमबीए करने के बाद पिता के बिजनेस को ज्वाइन किया. सिद्धार्थ को कोई बहुत बड़ा कॉर्पोरेट पद देने के बजाय, राजेश मेहता ने उन्हें कंपनी के आईटी और इन-हाउस सॉफ्टवेयर की कमान सौंपी, क्योंकि राजेश एक्सपोर्ट्स की सफलता के पीछे उनका अपना कस्टमाइज्ड बिलिंग और डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर था, जिसे आज सिद्धार्थ संभालते हैं. आज उसी पर सवाल उठे हैं. 

1200 उधार लेकर निकले थे, फिर...

1982 में 16 साल की उम्र में राजेश मेहता अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर बिजनेस करने चले. 1,200 उधार लिए और बेंगलुरु के नागराथपेट में चांदी के सिक्कों और बर्तनों की ट्रेडिंग शुरू की. राजेश मेहता की बिजनेस में गजब की समझ थी. उन्होंने जल्द ही भांप लिया कि चांदी से ज्यादा मुनाफा और डिमांड तो सोने में है.

1989 में गोल्ड जूलरी बनाने का काम शुरू किया. तभी राजेश एक्सपोर्ट नाम की कंपनी की नींव पड़ी जो आगे चलकर गोल्ड बिजनेस का सबसे बड़ा ब्रैंड बना. राजेश मेहता की बुद्धि और विवेक से समझा की भारत की ज्वेलरी मार्केट बिखरी हुई है. शुद्धता की कमी है, लेबर कॉस्ट बहुत ज्यादा है. राजेश मेहता, चेन्नई से जूलरी खरीदते और गुजरात के राजकोट में बेचते थे. धीरे-धीरे उन्होंने गुजरात में होलसेल में ज्वेलरी बेचने शुरू कर दिए. 

उन्होंने अपने गोल्ड बिजनेस का गेम चेंज किया. दुकान में बैठकर गोल्ड ज्वेलरी बेचना मंजूर नहीं किया. बेंगलुरु में भारत की पहली और सबसे बड़ी मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाई, जहां मशीनों से बड़े पैमाने पर गहने बनने लगे. 4 साल में धंधा ऐसा चमका कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर मार्केट में कदम रखने का फैसला किया. 1993 में कंपनी का IPO आया और फिर शुरू हुआ भारत की सबसे बड़ी गोल्ड ज्वैलरी एक्सपोर्टर कंपनी की सक्सेस की स्टोरी.

धीरे-धीरे सोने पर जमाया कब्जा!

राजेश मेहता ने माइन टू रिटेल बिजनेस मॉडल बनाया. कंपनी ने अपने हाथ में सोने की पूरी सप्लाई चेन का कंट्रोल रखा. साउथ अफ्रीका जैसे देशों में गोल्ड माइन खरीदे. 2015 में दुनिया की सबसे बड़ी स्विस गोल्ड रिफाइनरी Valcambi खरीदकर पूरी दुनिया के गोल्ड बिजनेस को कंट्रोल करने लगे. माइनिंग, प्रोडक्शन, रिफाइनरी, होलसेल, रिटेल सब कुछ राजेश मेहता की कंपनी के पास था. दुनिया की अकेली कंपनी है जिसके पास सोने की रिफाइनिंग से लेकर रिटेल बिक्री तक का काम है. शुभ ज्वैलर्स ब्रैंड खड़ा करके रिटेल में गोल्ड बेचने लगे. कहीं किसी मिडिलमैन की गुंजाइश नहीं थी. प्रॉफिट, वॉल्यूम दोनों में रिकॉर्ड तोड़ सफलता मिलती गई. 

अब क्या है विवाद?

जिस बिजनेस मॉडल और स्विस रिफाइनरी Valcambi को राजेश मेहता ने अपनी ताकत बनाया था, वही आज उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है. राजेश एक्सपोर्ट्स के एक शेयर होल्डर को कंपनी की बैलेंस शीट में कुछ अजीब लगा. शिकायत सेबी तक पहुंचाई और फिर शुरू हुई कंपनी के रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच. 

सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर कई बड़े आरोप लगाए हैं. राजेश एक्सपोर्ट ने पिछले 5 साल में ₹15 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट करने का दावा किया जबकि ऐसा कुछ हुआ नहीं. मतलब सोना या गहने बेचे नहीं. एक्सपोर्ट कागजों पर होता रहा. हर साल कंपनी दो तीन लाख करोड़ रुपये की बिक्री करती थी लेकिन मुनाफा एक हजार करोड़ रुपये से कम होता था. राजेश मेहता ने गलत तरीके से 339 करोड़ प्राइवेट अकाउंट में ट्रांसफर किए. 11,487 करोड़ के फर्जी खरीद-बिक्री के सौदे दिखाए. साउथ अफ्रीका की गोल्ड माइंस में 1,035 करोड़ का फर्जी निवेश दिखाया. कंपनी ने इसे सिर्फ एक कम्युनिकेशन गैप और कन्फ्यूजन बताया है. राहत है कि सेबी ने कंपनी को अपनी बेगुनाही के सबूत और जरूरी दस्तावेज पेश करने के लिए 30 दिनों का समय दिया है.

LIC पर क्यों मंडरा रहा संकट?

कभी लकी नेम बना राजेश का आज शेयर बाजार, इकोनॉमी के लिए डर का कारण बना. डरे हुए हैं इन्वेस्टर और डरी है देश की बड़ी सरकारी कंपनी एलआईसी जिसके लाखों करोड़ों रुपये डूब रहे हैं. LIC के साथ-साथ करीब 1.94 लाख से अधिक छोटे रिटेल निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये डूब चुके हैं. राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 1,029 के हाई से 90% गिरकर 100 रुपये पर आ गए. ट्रेडिंग पर बैन लग चुका है. राजेश मेहता और उनकी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स अब देश की दागी कंपनी बन चुकी है. घोटाले का खुलासा और मालिक पर बैन लगाने के बाद क्रैश का सिलसिला थमने वाला नहीं.

एलआईसी केवल सबसे बड़ी सरकारी इश्योरेंस कंपनी ही नहीं, भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक DII है. करीब 300-350 लिस्टेड कंपनियों एलआईसी ने इन्वेस्ट किया हुआ है. LIC के पास 225 से ज्यादा ऐसी एक्टिव कंपनियां हैं जिनमें उसकी हिस्सेदारी 1% से अधिक है. पूरे इक्विटी पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू ₹15.5 लाख करोड़ से ₹17 लाख करोड़ रुपये के बीच है.

14 दिग्गज ब्लू-चिप कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS, HDFC बैंक, ITC, SBI, टाटा ग्रुप, अदाणी की कंपनियों में एलआईसी का इन्वेस्टमेंट है. माना जाता है कि एलआईसी ने इन्वेस्टमेंट किया तो मतलब कंपनी दमदार भी होगी. राजेश एक्सपोर्ट्स भी लकी रही कि एलआईसी ने करीब 10.80 परसेंट स्टेक लिया. अब जबकि कंपनी डूब रही तो 100-200 शेयर खरीदने वाले ही नहीं, एलआईसी का भी मोटा पैसा डूब रहा है. कांग्रेस से जयराम रमेश ने सीधा पूछा है कि क्या सरकार के इशारे पर राजेश एक्सपोर्ट जैसी कंपनी में एलआईसी ने करीब 11 परसेंट स्टेक खरीदा? मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) को एक्शन लेने में 26 महीने की लंबी देरी क्यों हुई. सेबी ने जब जांच शुरू की तब माधवी पुरी बुच सेबी को हेड कर रही थीं.

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