Charchit Chehra: पढ़ाई छोड़ शुरू की थी एक्टिंग, फिर एक फोन कॉल और सयानी की राजनीति में एंट्री, जानिए कैसे ममता बनर्जी ने जताया था भरोसा!

Sayani Ghosh: टीएमसी सांसद और चर्चित अभिनेत्री-राजनेता सयानी घोष की राजनीतिक यात्रा एक बार फिर सुर्खियों में है. पढ़ाई छोड़कर एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली सयानी घोष को ममता बनर्जी के एक फोन कॉल ने राजनीति में ला खड़ा किया. जानिए कैसे टीएमसी की स्टार प्रचारक बनीं सयानी घोष, क्या रहे उनके बड़े विवाद, ममता और अभिषेक बनर्जी से उनके रिश्ते की पूरी कहानी.

TMC MP Sayani Ghosh
TMC MP Sayani Ghosh

रूपक प्रियदर्शी

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पश्चिम बंगाल में चल रहा उठा-पटक पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. दल-बदल के लिए बैग पैक तैयार लिए बैठीं देश की राजनीति चर्चित चेहरा सयानी घोष की प्रोफाइल लिखते समय ख्याल आया कि एक्टर, डांसर, सिंगर सयानी घोष की राजनीतिक पोरिवोर्तन या खेला होबे पर कौन सा सही बैठेगा. पहला एक गाना उपकार फिल्म का सूझा- कसमे वादे प्यार वफा सब बातें हैं, बातों का क्या... कोई किसी का नहीं ये झूठे, नाते हैं, नातों का क्या. दूसरा गाना जेहन में आया मासूम फिल्म का- तुझसे नाराज नहीं जिन्दगी हैरान हूं मैं. चार दिन की राजनीति में सयानी घोष की राजनीतिक वफादारी की कसमें कितनी कच्ची निकली.

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सयानी घोष की छोटी सी राजनीति के बड़े सफर पर कसमे वादे गाना इसलिए फिट कि उन्होंने अपनी दीदी को चुनाव जीतने के लिए क्या कुछ नहीं किया. जब आम आदमी पार्टी से राघव चड्ढा गए तो यही सयानी घोष थीं जिन्होंने कसम खाई कि मैं चड्ढा नहीं जो चड्डी बन जाऊंगी! चड्ढा चड्डी बन सकता है, सायोनी नहीं...घोष हमेशा घोष ही रहेगा. सयानी का अंडरवियर पॉलिटिक्स वाला तंज बीजेपी और राघव जैसे दल-बदलुओं पर था, जिसका बीजेपी ने भाषाई मर्यादा का उल्लंघन मानकर बुरा माना था लेकिन 4 मई को सब बदल गया. जहां चड्ढा अब वहीं सयानी घोष भी जा रही है. सयानी घोष भी चली जाएं तो ममता का और कितना क्या ही बिगड़ जाएगा. सयानी घोष से कोई नाराज नहीं हो सकता. बस ये सोचकर हैरान हो सकता है कि आखिर उनकी क्या मजबूरी हो गई ममता दीदी को छोड़कर बीजेपी के साथ जाने की. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए पूरी कहानी.

बीच में पढ़ाई छोड़ शुरू की एक्टिंग!

जनवरी 1993 में कोलकाता बॉर्न घोष बाबू की बेटी सयानी ने बचपन पर अपने लिए ग्लैमर की दुनिया में चमकने के सपने बुने नहीं थे. अनसंग स्टोरी है कि पढ़ाई को लेकर बहुत सीरियस थी. कोलकाता के मशहूर लॉरेटो कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई शुरू की थी. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. पढ़ाई के दौरान ही उन्हें एक्टिंग के बड़े ऑफर्स मिलने लगे. ग्लैमर की दुनिया की चकाचौंध और कैमरे के प्रति उनके जुनून ने उन्हें इस कदर खींचा कि उन्होंने फर्स्ट ईयर के बाद ही कॉलेज छोड़ दिया. 
 
सयानी ने टेलीफिल्म 'इच्छे दाना' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की. आगे शत्रु, राजकहिनी, व्योमकेश ओ चिड़ियाखाना जैसी फिल्में भी मिलीं और एक्टिंग की दमदारी दिखाने का मौका भी. बेहतरीन एक्ट्रेस नहीं, बल्कि एक शानदार सिंगर और बेबाक एंकर भी रहीं. कैमरे के सामने उनका कॉन्फिडेंस तब बड़ा काम आया जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा.

ममता का एक कॉल, बदल गई सयानी की जिंदगी!

ममता बनर्जी ने हर चुनाव में कुछ ऐसा मास्टर स्ट्रोक चला जिसकी काट बीजेपी के पास नहीं थी. बंगाल के ग्लैमर वर्ल्ड को राजनीति के साथ ऐसा मिक्स किया कि बड़ी-बड़ी एक्ट्रेस शताब्दी रॉय, देबोश्री रॉय, सायंतिका बनर्जी, मीमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां, सयानी घोष ममता बनर्जी के साथ खींचीं चली आईं. ममता ने एक्ट्रेसेस को विधायक, सांसद, मंत्री बनाकर पावर सेंटर बना दिया.

2021 में  बंगाल चुनाव का बिगुल बज चुका था. तभी सयानी घोष के फोन की घंटी बजती है. फोन लाइन पर खुद सीएम ममता बनर्जी थीं. दीदी के एक फोन कॉल ने सयानी की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. 24 फरवरी 2021 को सयानी टीएमसी का झंडा थाम लिया. आसनसोल साउथ से पहला विधानसभा चुनाव बीजेपी की बिग फेस अग्निमित्रा पॉल से हार गईं. लेकिन दीदी को लड़की के तेवर पसंद आ चुके थे.

ममता ने अपनी सीट से सयानी को जीताया!

2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने सयानी घोष पर सबसे बड़ा दांव खेला. दीदी ने अपनी सीट जाधवपुर सयानी को लड़ने के लिए दे दी. 2019 में ये सीट एक्ट्रेस मिमी चक्रवर्ती को मिली थी. माना जाने लगा कि सयानी घोष में वही फायर है जो ममता बनर्जी में था. सयानी घोष को ममता की परछाई, उत्तराधिकारी सब कहा, माना जाने लगा. सयानी ने भी निराश नहीं किया और ढाई लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से बंपर जीत दर्ज कर संसद का टिकट कटा लिया. सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक, सयानी घोष टीएमसी का सबसे चमकता हुआ यूथ फेस बन गईं. सयानी को टॉलीवुड में सॉफ्ट एक्ट्रेस माना जाता था, लेकिन राजनीति ने उनके भीतर के 'स्ट्रीट फाइटर' को जगा दिया.

हर मुश्किल में ममता बनर्जी अपनी लाडली के पीछे ढाल बनकर खड़ी रहीं. अभिषेक बनर्जी को सयानी का असली 'पॉलिटिकल गॉडफादर' माना जाता है. यह अभिषेक बनर्जी का ही भरोसा था कि 2021 में विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद सयानी घोष को टीएमसी की यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया, जो पद कभी खुद अभिषेक संभालते थे.

पार्टी का एक मजबूत स्तंभ है सयानी!

नुसरत जहां से लेकर मिमी चक्रवर्ती तक, टॉलीवुड की कई अप्सराओं ने दीदी के आशीर्वाद से संसद का रास्ता तय किया. लेकिन पार्टी के भीतर सयानी घोष की कहानी नुसरत और मिमी से बिल्कुल जुदा है. जहां नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती को राजनीति में 'पार्ट-टाइम' राजनेता माना गया, जो संसद में अपनी अटेंडेंस और क्षेत्र की जनता से दूरी को लेकर हमेशा विवादों में रहीं, वहीं सयानी घोष ने खुद को टीएमसी की 'फुल-टाइम स्ट्रीट फाइटर' साबित किया. सयानी सिर्फ ग्लैमर का चेहरा नहीं बनीं, बल्कि जून मालिया या शताब्दी रॉय की तरह उन्होंने जमीन पर उतरकर पसीना बहाया.'

सयानी की भाषण बनी पहचान

संसद के गलियारों में सयानी घोष की एंट्री किसी कड़क चाय जैसी रही है- तेज, कड़वी और होश उड़ा देने वाली. मोदी के अच्छे दिन वाले नारे से लेकर महंगाई की थाली तक- उनके 3 महा-वायरल भाषणों ने रातों-रात नेशनल स्टार और बीजेपी के खिलाफ देश की मजबूत विपक्षी आवाज बना दिया. सयानी घोष की सबसे बड़ी ताकत और पहचान बने उनके भाषण. बंगाल के गांव-गलियों से लेकर संसद तक सयानी घोष के हर भाषण वायरल होते रहे. चुनाव की शुरूआत में उनके भाषण कि चाय से शुरू हुई थी सरकार, गाय पर अटक गई. विकास के पापा मोदी जी रास्ते में भटक गए. उनके भाषणों के पंचलाइन वायरल होकर बंगाल की गलियों में नारों की तरह गूंजने लगे. 

क्या काबा-मदीना गाने ने खराब कर दिया खेल?

सयानी घोष तृणमूल की स्टार कैंपेनर तो पहले दिन से थीं लेकिन चुनाव पलटने वाला गाना वो बना जब सयानी घोष ने गाया. 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुसलमान बहुल इलाके में कैंपेन करते समय  कव्वाल अब्दुल रहमान बोयाती का मशहूर सूफी सॉन्ग रट कर आईं- मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना. बीजेपी ने गाने को लेकर ममता का मुस्लिम तुष्टीकरण माना. बीच चुनाव स्कूल भर्ती घोटाले में ED ने 11 घंटे तक लंबी पूछताछ की.

टीएमसी को उम्मीद थी कि काबा-मदीना करने से मुसलमान वोट एकदम ममता के साथ होगा लेकिन बीच चुनाव दांव उल्टा पड़ने लगा. डैमेज कंट्रोल के लिए सयानी को मंच से हनुमान चालीसा का पाठ तक करना पड़ा, लेकिन तब तक तीर कमान से छूट चुका था. 4 मई को रिजल्ट आए तो सयानी घोष पर तोहमत लगने लगे कि उन्होंने काबा-मदीना करके ममता के हिंदू वोटर्स को नाराज कर दिया जिसका फायदा बीजेपी ले उड़ी. सयानी के गाने पर ममता की हार का सबसे बड़ा गेमचेंजर टैग चिपक चुका है. 

सयानी की बहु-चर्चित विवादित कहानी

सयानी घोष की राजनीतिक पारी तो बहुत बाद में शुरू हुई, राजनीतिक निशाने पर पहले आईं. 2015 में भयंकर बवाल मचा जब उनके  सोशल मीडिया हैंडल से महाशिवरात्रि पर बेहद आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की गई. जिसमें शिवलिंग को कंडोम से कवर दिखाया गया. बीजेपी, हिंदू संगठनों ने भयंकर हंगामा मचाया. सायनी ने अकाउंट हैकिंग का दावा किया, पोस्ट डिलीट किया. माफी मांगी लेकिन आज तक कंडोम वाला शिवलिंग सयानी से चिपका है. 

सयानी का लव-लाइफ और नेटवर्थ!

अब बात सयानी घोष की लव लाइफ और उनकी शादी की! बड़े पर्दे पर कई रोमांटिक किरदार निभाने वाली सयानी घोष असल जिंदगी में अब तक 'सिंगल' हैं. सयानी का मानना है कि उनका पहला और आखिरी प्यार सिर्फ उनका करियर है. एक बेहद दिलचस्प इंटरव्यू में सयानी ने बताया था कि वो शादी में जाने से कतराती हैं! क्योंकि जैसे ही वो किसी शादी में जाती हैं, उनके माता-पिता और रिश्तेदार उनसे बस एक ही सवाल पूछने लगते हैं-'तुम कब शादी करोगी?' सयानी कहती हैं कि वे अपनी शर्तों पर जीने वाली आजाद ख्याल महिला हैं, इसलिए फिलहाल उनकी लाइफ में प्यार या शादी के लिए 'नो एंट्री' का बोर्ड लगा है.

सयानी घोष की कुल नेटवर्थ चौंकाने वाली है. एक्टिंग से लेकर राजनीति तक उन्होंने कुल 92 लाख की संपत्ति जोड़ी जबकि करीब 60 लाख का लोन ले रखा है. कोलकाता में उनके घर पर कोई महंगी विदेशी ब्रीड के कुत्ते नहीं, बल्कि उन्होंने सड़क से रेस्क्यू किए गए 4 आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) को गोद ले रखा है. सयानी खुद को इन बेजुबानों की 'सिंगल मदर' कहती हैं.

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