देश में लगातार सामने आ रहे NEET और CBSE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है. इस बीच, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी (SPPU) परिसर में 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित एक आंदोलन को युवाओं का भारी समर्थन मिला है. इस आंदोलन में सोनम वांगचुक ने भी हिस्सा लिया. आंदोलन के दौरान संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश के युवाओं से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है.
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'हमें फेक कहने के बजाय युवाओं की बात सुने सरकार'
पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, 'देश में जब भी कोई आंदोलन होता है, तो आंदोलनकारियों को बदनाम करने की कोशिश की जाती है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश आंदोलनों के माध्यम से ही आजाद हुआ है और आज लोकतंत्र भी आंदोलनों की वजह से ही जिंदा है. सरकार हमें 'फेक' कहने के बजाय, अपनी आवाज उठा रहे देश के युवाओं की बात को समझे. दुर्भाग्य से यह सरकार इस विषय पर चर्चा करने के लिए भी तैयार नहीं है.'
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
दीपके ने आगे कहा कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में मची धांधली के कारण देश के 1 करोड़ से अधिक छात्रों के साथ घोर अन्याय हुआ है और उनके भविष्य से खिलवाड़ किया गया है. उन्होंने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
उन्होंने बताया कि इस शांतिपूर्ण आंदोलन में मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हो रहे हैं. इस आंदोलन के मंच से संगठन का 'शिक्षा विषयक घोषणापत्र' (Education Manifesto) भी जारी किया जाएगा. इस दौरान वरिष्ठ वकील एडवोकेट असीम सरोदे और जाने-माने विचारक डॉ. विश्वंभर चौधरी भी उपस्थित रहे.
पुणे से शुरू हुआ आंदोलन अब नागपुर, लखनऊ और बेंगलुरु जाएगा
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि पुणे को 'शिक्षा का मायका' माना जाता है, इसलिए इस बड़े आंदोलन की शुरुआत यहीं से की जा रही है. आने वाले समय में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा और देश के अन्य प्रमुख शहरों जैसे नागपुर, लखनऊ और बेंगलुरु में भी इसी तरह के बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनकी आवाज और विचारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.
'लोकतंत्र को बचाना है तो जनआंदोलन ही एकमात्र रास्ता'
आंदोलन का समर्थन करते हुए वरिष्ठ विचारक डॉ. विश्वंभर चौधरी ने कहा, 'यह आंदोलन पूरी तरह से महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अहिंसक विचारों पर आधारित है. अगर देश में लोकतंत्र को बचाना है, तो जनआंदोलन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.'
वहीं, एडवोकेट असीम सरोदे ने परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों पर सरकार की असंवेदनशीलता को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में हो रही धांधली और मानसिक तनाव के कारण छात्र अपनी जान दे रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं है. सत्ता में बैठे लोगों में अपनी गलतियां मानने और माफी मांगने की प्रवृत्ति खत्म हो चुकी है.
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