भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की स्पेस एजेंसी CNES मिलकर TRISHNA नामक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट मिशन विकसित कर रहे हैं. यह सैटेलाइट 2027 में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च होने वाला है. TRISHNA का पूरा नाम Thermal infra Red Imaging Satellite for High-resolution Natural resource Assessment है. यह सैटेलाइट सूर्य-समकालिक कक्षा में लगभग 761 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करेगी. इसकी मिशन लाइफ लगभग पांच वर्ष निर्धारित है.
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सैटेलाइट की मुख्य विशेषताएं
TRISHNA में दो मुख्य उपकरण होंगे. फ्रांस का CNES थर्मल इन्फ्रारेड पेलोड उपलब्ध करा रहा है, जो भूमि की सतह के तापमान और उत्सर्जन को मापेगा. भारत का ISRO विजिबल, नियर इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड ऑप्टिकल पेलोड तैयार कर रहा है. यह सैटेलाइट भूमि और तटीय क्षेत्रों के लिए लगभग 57 मीटर (उत्पाद रिज़ॉल्यूशन लगभग 60 मीटर) का उच्च रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेगा. एक ही स्थान को लगभग हर तीन दिन में दोबारा देखा जा सकेगा. मौजूदा कई सिस्टम या तो कम रिज़ॉल्यूशन देते हैं या लंबे अंतराल पर डेटा उपलब्ध कराते हैं. TRISHNA उच्च रिज़ॉल्यूशन और अपेक्षाकृत अधिक फ्रीक्वेंसी का संयोजन देने वाला है.
TRISHNA मुख्य रूप से भूमि सतह के तापमान, वाष्पीकरण-उत्सर्जन और वनस्पति में पानी की कमी की निगरानी करेगा. इससे कृषि क्षेत्र में सिंचाई प्रबंधन, सूखे की तैयारी, शहरी गर्मी द्वीपों का अध्ययन, हिमालयी ग्लेशियरों और बर्फ पिघलने की निगरानी तथा तटीय व अंतर्देशीय जल की गुणवत्ता पर नजर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
भारत-फ्रांस सहयोग की पृष्ठभूमि
दोनों देशों के बीच स्पेस सहयोग नया नहीं है. 2011 में उन्होंने Megha-Tropiques सैटेलाइट लॉन्च किया था, जिसने उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में मानसून, बादलों और वर्षा संबंधी अध्ययन में योगदान दिया. भारतीय रॉकेटों में इस्तेमाल होने वाले विकास इंजन की तकनीक फ्रांस के वाइकिंग इंजन से जुड़ी रही है. दोनों देश गगनयान मिशन सहित अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग जारी रखे हुए हैं.
2024 में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और एरियनस्पेस के बीच एक समझौता ज्ञापन भी हुआ था, जिसके तहत LVM-3 और Ariane 6 रॉकेटों के वाणिज्यिक उपयोग पर सहयोग की संभावना तलाशी गई. TRISHNA मिशन जल संसाधन प्रबंधन, कृषि और जलवायु संबंधी अध्ययनों के लिए उपयोगी डेटा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. लॉन्च की तैयारी जारी है और फ्रांसीसी उपकरण भारत में एकीकृत किए जा रहे हैं.
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