आ रहा India का नया युद्धपोत INS Malvan,आधुनिक सोनार सिस्टम लेैस !

आयुष मिश्रा

20 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 20 2026 5:32 PM)

22 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा INS मालवान भारत का अत्याधुनिक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। जानिए इसकी ताकत, फीचर्स और क्यों इसे दुश्मन पनडुब्बियों का सबसे बड़ा शिकारी माना जा रहा है।

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तस्वीर इंडियन नेवी के X से
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आज का भारत वो भारत नहीं है जो अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों की तरफ देखता था .आज का भारत वो है, जो समंदर की लहरों पर अपनी किस्मत खुद लिख रहा है . अभी कुछ ही दिनों पहले आपने INS महेंद्रगिरि की दहाड़ सुनी थी, और अब समंदर का एक और 'स्वदेशी शिकारी' अपनी ड्यूटी पर तैनात होने के लिए तैयार है . तारीख नोट कर लीजिए, 22 जुलाई! यह वो दिन है जब भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है 'INS मालवान' . यह सिर्फ एक जहाज नहीं है, बल्कि दुश्मनों की पनडुब्बियों के लिए साक्षात काल है . एक ऐसा युद्धपोत, जो पानी की सतह के नीचे छिपकर बैठे गद्दारों को सूंघकर ढूंढ लेगा और उन्हें वहीं दफन कर देगा जहां से वो आए थे . आज हम बात करेंगे कि आखिर क्यों INS मालवान को 'छोटा पैकेट, बड़ा धमाका' कहा जा रहा है? कैसे यह जहाज चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की नींद उड़ाने वाला है? और कैसे भारत अब दुनिया की 'वॉरशिप फैक्ट्री' बन चुका है?

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दरअसल, 22 जुलाई का दिन भारतीय नौसेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है . 'माहे-क्लास' के इस दूसरे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) यानी INS मालवान को आधिकारिक तौर पर नौसेना में कमीशन कर लिया जाएगा . इस गौरवशाली कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसकी अध्यक्षता खुद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह (चीफ ऑफ एयर स्टाफ) करेंगे . समंदर के कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारतीय सशस्त्र बल अब 'थिएटर कमान' और आपसी तालमेल की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं . उनके साथ वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन भी मौजूद रहेंगे . यह जहाज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) की मेहनत का नतीजा है, जिसने रिकॉर्ड समय में इसे तैयार कर 31 मार्च 2026 को ही नौसेना को सौंप दिया था . अब इसके सारे कठिन ट्रायल्स पूरे हो चुके हैं और यह समंदर में उतरने के लिए मुस्तैद है .
 
अब सवाल आता है कि INS मालवान को 'स्वदेशी शिकारी' क्यों कहा जा रहा है? इसके नाम के पीछे छिपी तकनीक को समझिए . यह एक ASW-SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) है . आसान भाषा में कहें तो, अक्सर दुश्मन देश की पनडुब्बियां भारत की तटीय सीमा के पास, जहां पानी कम गहरा होता है, वहां छिपकर जासूसी करने या हमला करने की कोशिश करती हैं .बड़े युद्धपोत कम गहरे पानी (Shallow Water) में उतने कारगर नहीं होते . यहीं पर एंट्री होती है INS मालवान की

INS मालवान की खासियतें:

  • सटीक शिकार: इसमें आधुनिक सोनार सिस्टम लगे हैं जो पानी के नीचे मीलों दूर छिपी पनडुब्बी की हलचल को पहचान लेते हैं .
  • घातक हथियार: एक बार दुश्मन का पता चला, तो इसमें लगे स्वदेशी टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर्स उसे बचने का एक भी मौका नहीं देंगे .
  • फुर्तीला शरीर: यह आकार में बड़ा नहीं है, लेकिन इसकी रफ्तार और मुड़ने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है . यह किसी भी संकरी जगह में घुसकर दुश्मन पर वार कर सकता है .

भारत की समुद्री सीमा 7,500 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है . पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी हमेशा ताक में रहते हैं . INS मालवान जैसे जहाजों की तैनाती का मतलब है कि अब भारत के तटों के पास कोई भी दुश्मन 'सर्फेस' के नीचे सुरक्षित नहीं है .

गौर करने वाली बात ये है कि भारत अब युद्धपोत खरीद नहीं रहा, बल्कि बना रहा है . INS मालवान इस बात का जीता-जागता सबूत है . इस जहाज में 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है . आज भारत को 'वॉरशिप फैक्ट्री' कहा जा रहा है और इसके पीछे ठोस कारण हैं . एक समय था जब हमें एक जहाज के लिए सालों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन आज कोचीन शिपयार्ड और मझगांव डॉक जैसे हमारे शिपयार्ड्स हर कुछ महीनों में एक नया स्वदेशी अजूबा पेश कर रहे हैं . चाहे वो विमानवाहक पोत INS विक्रांत हो, या फिर मालवान जैसे छोटे लेकिन घातक शिकारी . यह 'आत्मनिर्भर भारत' की वो तस्वीर है जो दुनिया को बता रही है कि रक्षा क्षेत्र में भारत अब दूसरों की बैसाखियों पर नहीं चलता . हम अपनी जरूरत के हथियार खुद डिजाइन कर रहे हैं, खुद बना रहे हैं और जल्द ही दुनिया को एक्सपोर्ट भी करेंगे .
 
खैर, INS मालवान का नौसेना में आना इस बात का ऐलान है कि हिंद महासागर का राजा सिर्फ भारत है . यह जहाज तेज है, आधुनिक है और गर्व से भारतीय है . यह उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो समंदर के रास्ते भारत की अखंडता को चुनौती देने का सपना देखते हैं . 22 जुलाई को जब एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस जहाज को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा . क्योंकि अब समंदर की गहराइयों में गद्दारों के लिए कोई जगह नहीं बची है .