कौन हैं प्रणव झा, जिन्हें कांग्रेस ने झारखंड से बनाया अपना राज्यसभा उम्मीदवार? जानिए NSUI से लेकर कैंडिडेट बनने तक का सफर

Jharkhand Rajya Sabha Election 2026: कांग्रेस ने झारखंड से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर प्रणव झा को मैदान में उतारा है. जानिए NSUI से राजनीति शुरू करने वाले प्रणव झा का राजनीतिक सफर, मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी होने की कहानी, बोकारो कनेक्शन और राज्यसभा चुनाव में जीत का पूरा गणित.

Congress Candidate Pranav Jha
Congress Candidate Pranav Jha

न्यूज तक डेस्क

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Pranav Jha Profile: 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. झारखंड में भी राज्यसभा के दो सीटों पर चुनाव होने हैं और इसी बीच गुरुवार देर रात कांग्रेस ने एक सीट पर अपना पत्ता खोल दिया है. कांग्रेस ने इस बार पार्टी के सचिव और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी और हेमंत सोरेने के बीच बातचीत होने के बाद ही उनके नाम पर मुहर लगी थी. हालांकि प्रणव झा के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा क्योंकि जीतने के लिए उन्हें सहयोगी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी. आइए जानते है आखिर कौन हैं प्रणव झा जिसपर पार्टी ने लगाया दांव, कैसे हुई उनकी एंट्री और क्या है झारखंड में राज्यसभा चुनाव जीतने का समीकरण?

कौन हैं प्रणव झा जिसपर पार्टी ने लगाया दांव!

प्रणव झा AICC के पुराने साथियों में से एक है, जो पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के हमेशा काम करते रहे. वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के करीबी और राजनीतिक सलाहकार है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब मल्लिकार्जुन खरगे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था, तब उनके कार्यालय को मजबूत करने के लिए 4 नेताओं को विशेष ग्रुप बनाया गया था, जिसमें प्रणव भी शामिल थे. प्रणव काफी लंबे समय से कांग्रेस के केंद्रीय संगठन में एक्टिव रहे हैं और साल 2017 में उन्हें कांग्रेस के संचार विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी. इससे पहले प्रणव मीडिया कोऑर्डिनेटर के रूप में भी काम कर चुके थे.

बिहार के निवासी, बोकारो से खास कनेक्शन

बिहार के भागलपुर के कहलगांव के निवासी प्रणव झा का यहां के अलावा बोकारो से खास कनेक्शन है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रणव झा के पिता की बोकारो में नौकरी थी, जिस वजह से उनकी परवरिश और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बोकारो से हुई थी. मिली जानकारी के मुताबिक आज भी बोकारो के सेक्टर-6 में उनका अपना आवास है.'

NSUI से राजनीतिक एंट्री

स्कूली शिक्षा लेने के बाद प्रणव झा दिल्ली आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की. मिली जानकारी के मुताबिक इस दौरान ही उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से राजनीति में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने पार्टी के लगातार काम किया और कांग्रेस संगठन में अलग-अलग कई जिम्मेदारियां संभाली. वे धनबाद संसदीय क्षेत्र से युवा कांग्रेस के प्रभारी पद पर भी रहे है. प्रणव पार्टी के काफी भरोसेमंद चेहरों में से एक है. प्रणव अक्सर पर्दे के पीछे से ही पार्टी के लिए काम करते है और कई मौकों पर झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी भी संभाली है.

क्या है जीत का समीकरण?

झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें है. अगर पार्टी-वाइज सीटों की संख्या देखें तो कांग्रेस या किसी भी पार्टी के पास अपने बल पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है. दरअसल राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों की जरूरत होती है. लेकिन कांग्रेस के पास फिलहाल 16 विधायक ही है.  

महागठबंधन- 56 विधायक जिसमें JMM के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल है.

NDA- 24 विधायक जिसमें भाजपा के 21, आजसू के 1, जदयू के 1 और लोजपा-आर के 1 विधायक शामिल है.

प्रणव झा के लिए चुनौती क्यों?

झारखंड में महागठबंधन के पास 56 सीटों के साथ बहुमत तो है लेकिन हाल के दिनों में जो महागठबंधन में उथल-पुथल मची हुई है, इसे देखकर कहा जा रहा है कि प्रणव झा के लिए यह चुनाव काफी मुश्किलों से भरा हो सकता है. प्रणव झा को जीतने के लिए JMM, राजद और माले विधायकों को अपने साथ रखना होगा. वहीं भाजपा को एक सीट जीतने के लिए सिर्फ 4 विधायकों की जरूरत है. हालांकि अभी तक बीजेपी की ओर से किसी कैंडिडेट का ऐलान नहीं किया गया है.

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