भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर उस वक्त तनाव की स्थिति पैदा होने लगी थी, जब एक व्यक्ति कई घंटों तक नौ मैन्स लैंड में मिला. BSF ने व्यक्ति को पकड़ लिया और शख्स के बांग्लादेशी होने की वजह से उसे वापस भेजना चाहा तो बांग्लादेश ने उसे स्वीकार ही नहीं किया. मामले के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, फिर आखिरकार 11 जून को उनके पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार के हवाले कर दिया गया. मिली जानकारी के मुताबिक इस शख्स का नाम सती राजबंशी है और वह हिंदू समुदाय से है. साथ ही दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेशी दल ने जानबूझकर उन्हें भारत में भेजने की कोशिश की थी. इस मामले में अब चर्चा होने लगी है कि सती राजबंशी कौन हैं और उसकी वापसी कैसे हुई है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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कौन हैं सती राजबंशी?
मिली जानकारी के मुताबिक, 55 साल के सती राजबंशी हिंदू है और वे बांग्लादेश के राजशाही जिले के गुडागाड़ी थाना क्षेत्र के चलना गांव के रहने वाले है. उनके पिता का नाम स्वर्गीय बाघबत्ता राजबंशी बताया जा रहा है. BSF के अनुसार, वह बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन उन्हें मेघालय के महेंद्रगंज के पास नंदिरचार सेक्टर में पकड़ लिया गया.
BSF ने दावा किया कि सती की जांच पड़ताल करने के बाद वह बांग्लादेश के निवासी पाए गए. नियमों के मुताबिक कार्रवाई करते हुए उन्हें बांग्लादेश वापस भेजा गया, लेकिन इस दौरान बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड यानी BGB ने उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया. इस दौरान कई घंटों तक सती राजबंशी नौ मैन्स लैंड में फंसे रहे.
बॉर्डर पर BSF-BGB के बीच तनाव
इस मामले में हालात तब और खराब बिगड़े जब BSF और BGB के अधिकारियों के बीच उनकी पहचान और नागरिकता को लेकर बहस शुरू हो गई. आलम ये हुआ कि दोनों ही देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई, लेकिन शुरुआती समय में इसमें भी कोई समाधान नहीं निकला. नतीजतन सती राजबंशी को पूरी रात सीमा क्षेत्र में रही रहना पड़ा.
इस मामले से जुड़ी कई तरह के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिसमें कथित तौर पर दोनों देशों के जवानों के बीच बहस और सती राजबंशी के फंसे होने की तस्वीरें दिखाई गई. हालांकि इन वीडियोज की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
BSF ने बांग्लादेश पर लगाए गंभीर आरोप
BSF ने सती की पहली ही जांच पड़ताल कर ली थी और उनका साफ कहना था कि वो बांग्लादेशी नागरिक है और उन्हें राजशाही गांव से लाया गया था. साथ ही BSF के अधिकारियों ने उन रिपोर्ट्स को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें दावा किया जा रहा था कि सती राजबंशी दिव्यांग है. BSF ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि बांग्लादेश के अधिकारियों ने खुद सती राजबंशी को पकड़कर भारत में धकेलने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों ने उन्हें घुसने नहीं दिया.
परिवार में दिखाया कागज, चले गए बांग्लादेश!
सती राजबंशी को लेकर जो दोनों देशों के बीच तनाव चल रहा था, वह आखिरकार गुरुवार सुबह समाप्त हो गया. सती के परिजनों मौके पर जरूरी दस्तावेजों के साथ पहुंचे. दस्तावेजों की पहले गहनता से जांच की गई और पहचान की पुष्टि होने के बाद अधिकारियों ने उन्हें परिवार को सौंप दिया.
इस घटना की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि हाल के दिनों में भारत ने सीमा घुसपैठ को लेकर अपनी कार्रवाई तेज कर दी. पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश के नागरिकों पर लगातार कार्रवाई हो रही है और इसलिए बॉर्डर पर लगातार हलचल तेज है. इस पूरी प्लानिंग के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह है जो कि खुद इसकी निगरानी भी कर रहे है.
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