उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे पनपथा बफर एरिया के पास रामनरेश नाम का चरवाहा अपने मवेशी चरा रहा था. इसी दौरान उसकी दो भैंसें भटककर कोर एरिया के कक्ष क्रमांक RF 443 की तरफ चली गईं.
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जब रामनरेश अपनी भैंसों को वापस लाने के लिए जंगल के अंदर गया, तभी अचानक उसका सामना अपने शावक के साथ मौजूद एक बाघिन से हो गया. रामनरेश को देखते ही बाघिन ने उस पर छलांग लगा दी. हमले में रामनरेश का हाथ जख्मी हो गया.
भैंसों के झुंड ने खदेड़ा बाघिन को
जान बचाने के लिए रामनरेश ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया. चरवाहे की आवाज सुनते ही पास में मौजूद उसकी भैंसों का झुंड मौके पर पहुंच गया. अपनी मालिक पर खतरा मंडराते देख भैंसों ने बिना डरे बाघिन की तरफ तेज दौड़ लगा दी. अचानक दर्जनों भैंसों को अपनी ओर हमलावर होते देख बाघिन घबरा गई और रामनरेश को छोड़कर घने जंगल में भाग खड़ी हुई.
पीड़ित चरवाहे की आपबीती
इलाज के दौरान अस्पताल पहुंचे रामनरेश ने आपबीती सुनाते हुए बताया:
- अगर मेरी भैंसें न होतीं, तो आज मैं जिंदा न बच पाता. बाघिन मुझे उठाकर ले जाती. भैंसों ने मौके पर पहुंचकर मेरी जान बचा ली.
- घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल रामनरेश को मानपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया.
वन विभाग ने जारी की चेतावनी
पनपथा परीक्षेत्र अधिकारी रमेश पाटले के अनुसार, पीड़ित का उपचार करा दिया गया है और वह खतरे से बाहर है. चूंकि क्षेत्र में शावक के साथ बाघिन की मौजूदगी पाई गई है, इसलिए वन विभाग की टीम लगातार इलाके में गश्त और निगरानी कर रही है. वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों और चरवाहों को अकेले जंगल में न जाने और मवेशी चराते समय विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है.
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