जज बनने के बाद छोड़ा सांसारिक जीवन, बैतूल की प्रखरश्री दीदी लेंगी जैनेश्वरी दीक्षा, बिनौली यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

प्राची अवस्थी

02 Nov 2026 (अपडेटेड: Nov 2 2026 4:59 PM)

बैतूल की प्रखरश्री दीदी ने माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए सिविल जज की परीक्षा पास की, लेकिन अब वे सांसारिक जीवन त्यागकर जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रही हैं. पढ़ें पूरी खबर.

जज की परीक्षा पास करने के बाद अब बनेंगी सांध्वी
Prakharshree Didi
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डीजे की धुन, थिरकते कदम और चेहरे पर छाई खुशियां... पहली नज़र में यह दृश्य किसी भव्य शादी-समारोह का महसूस होता है, लेकिन यह तस्वीरें किसी वैवाहिक कार्यक्रम की नहीं, बल्कि एक भावुक कर देने वाली विदाई की हैं. बैतूल में इन दिनों आस्था और वैराग्य का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. वजह है बैतूल की बेटी प्रखरश्री दीदी, जो सिविल जज की परीक्षा पास करने के बाद अब वैराग्य पथ पर अग्रसर होने जा रही हैं.

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माता-पिता का सपना पूरा किया, फिर चुना अध्यात्म का रास्ता

प्रखरश्री दीदी के माता-पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी जज बने. अपने माता-पिता के इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की और परीक्षा में सफलता हासिल की. परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं था, लेकिन ज्वाइनिंग से ठीक पहले प्रखरश्री दीदी ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने सभी को हैरान और भावुक कर दिया.जिस बेटी को माता-पिता जज की कुर्सी पर आसीन देखना चाहते थे, उसने सांसारिक जीवन का त्याग कर भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने यानी साध्वी बनने का संकल्प ले लिया.

'जज या वकील से ज्यादा समाज सेवा वैराग्य मार्ग पर संभव'

जज बनने के बाद साध्वी जीवन चुनने के पीछे की वजह बताते हुए प्रखरश्री दीदी ने कहा कि माता-पिता की इच्छा का मान रखते हुए उन्होंने परीक्षा पास कर उनका सपना पूरा कर दिया. हालांकि, उनके मन में बचपन से ही वैराग्य का भाव था. उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वे समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी भगवान महावीर के मार्ग पर चलकर कर सकती हैं.

भव्य बिनौली में शामिल हुईं 4 अन्य दीक्षार्थी बहनें

इस ऐतिहासिक और भव्य बिनौली यात्रा में प्रखरश्री दीदी के साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनें भी शामिल हुईं. इस मौके पर बाल ब्रह्मचारिणी रंगोली दीदी ने कहा कि रंगीन कपड़ों से सफेद वस्त्रों तक का यह सफर किसी अलौकिक यात्रा से कम नहीं है. दीक्षा ग्रहण करने के बाद जीवनभर केवल सफेद वस्त्र ही धारण करने होते हैं.

उदयपुर का बैंड, विंटेज कारें और शाही बग्घियां बनीं आकर्षण

बैतूल में इस विदाई पल को यादगार बनाने के लिए उदयपुर का विशेष बैंड, विंटेज कारों का काफिला और शाही बग्घियां शामिल हुईं. यात्रा के दौरान स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बहनों का आत्मीय स्वागत किया.गौरव प्रखरश्री दीदी की शुरुआती शिक्षा भोपाल से हुई. इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद से LLB में गोल्ड मेडल हासिल किया और प्रतिष्ठित 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' से उच्च शिक्षा प्राप्त की. साल 2023 में सिविल जज बनने के बावजूद उन्होंने अपने इस करियर को छोड़कर अध्यात्म का रास्ता चुना.अब प्रखरश्री दीदी समेत पांचों बहनें 22 नवंबर को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी, जिसके बाद उनका संपूर्ण जीवन साधना और जन-कल्याण के लिए समर्पित रहेगा.