मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग का एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर माता-पिता को चिंता में डाल दिया है. यहां ऐशबाग थाना क्षेत्र में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक 17 साल की मासूम छात्रा की सोशल मीडिया तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अश्लील वीडियो और फोटो में बदल दिया गया. इन फर्जी तस्वीरों के जरिए दो युवक उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहे थे. इस मानसिक प्रताड़ना और बदनामी के डर से टूटकर छात्रा ने आखिरकार एक आत्मघाती कदम उठा लिया.
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सोशल मीडिया से उठाई फोटो
रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल दौर की इस खतरनाक तकनीक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल एक हंसती-खेलती छात्रा की जिंदगी पर भारी पड़ गया. आरोपियों ने पहले छात्रा की सोशल मीडिया प्रोफाइल से उसकी सामान्य तस्वीरें निकालीं और फिर एआई (AI) टूल का इस्तेमाल करके उन्हें अश्लील रूप दे दिया. इसके बाद वे छात्रा को धमकी दे रहे थे कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो वे इन आपत्तिजनक फोटो और वीडियो को इंटरनेट पर वायरल कर देंगे.
स्कूल आते-जाते करते थे पीछा
छात्रा के परिजनों का आरोप है कि आरोपी सिर्फ ऑनलाइन धमकियां और ब्लैकमेलिंग तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि वे स्कूल आने-जाने के दौरान भी उसका लगातार पीछा करते थे और डराते-धमकाते थे. लगातार मिल रही धमकियों ने छात्रा को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था.
घटना वाले दिन पीड़ित छात्रा ने अपनी छोटी बहन को किसी काम के बहाने कमरे से बाहर भेजा और फिर अंदर से दरवाजा बंद कर खुद की जान ले ली . मृतका के भाई ने बताया, "शौर्य और अमित नाम के दो लड़के उसे परेशान कर रहे थे. उनके पास एआई से बनाई कुछ गंदी फोटो-वीडियो थीं, जिसे दिखाकर वे उसे ब्लैकमेल कर रहे थे. इसी से तंग आकर उसने शाम करीब 6:30 बजे दादी के घर पर खुद की जान ले ली.
मामले की जांच शुरू
इस दुखद घटना के बाद गुस्से में आए परिजनों और स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव भी किया था. इस मामले पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मर्ग कायम कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है. परिजनों के बयान दर्ज होने के बाद आगे की कड़ी जांच की जाएगी. साइबर सुरक्षा को लेकर पुलिस ने बताया कि बच्चियों और आम लोगों को इस तरह के डिजिटल ट्रैप से बचाने के लिए साइबर अवेयरनेस कैंपेन (जागरूकता अभियान) लगातार चलाए जाते हैं. अगर कोई भी व्यक्ति एआई जनरेटेड फर्जी कंटेंट के जरिए किसी को प्रताड़ित करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है.
भोपाल की यह घटना सिर्फ खुद के जान लेने का मामला नहीं है, बल्कि यह ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया के दौर में तकनीक के बेलगाम दुरुपयोग पर एक बड़ा अलार्म है. अभिभावकों और प्रशासन दोनों के लिए अब डिजिटल सुरक्षा सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है
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