मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है. सरकार और किसान संगठनों के बीच लगातार बातचीत के बाद 30 जुलाई को सहमति बन गई. इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने धरना समाप्त करने का ऐलान किया. सरकार ने मूंग की MSP पर खरीद बढ़ाने के साथ खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है. किसानों की दूसरी मांगों पर भी सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है.
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मूंग की MSP खरीद को लेकर था बड़ा मुद्दा
किसानों के आंदोलन की प्रमुख मांग ग्रीष्मकालीन मूंग की MSP पर खरीद बढ़ाना था. किसानों का कहना था कि इस बार मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है, लेकिन सरकारी खरीद सीमित होने के कारण बड़ी मात्रा में उपज खुले बाजार में बेचनी पड़ सकती है. इससे किसानों को MSP से कम कीमत मिलने का खतरा था.
इसी मुद्दे के साथ खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था का भी विरोध हो रहा था. किसानों का आरोप था कि नई व्यवस्था के कारण खाद मिलने में परेशानी हो रही है. इसका असर खेती के काम पर पड़ रहा है. इन मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 19 किसान संगठन आंदोलन में शामिल हुए थे.
अब पात्र किसान की 60 फीसदी उपज खरीदेगी सरकार
कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस साल मध्य प्रदेश में 4.52 लाख मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदने का लक्ष्य तय किया है.
पहले प्रत्येक पात्र किसान की 25 फीसदी उपज MSP पर खरीदने की व्यवस्था थी. अब इसे बढ़ाकर 60 फीसदी करने का फैसला किया गया है.
नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में इसके तहत करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग की खरीद होने की बात कही गई है.
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए स्लॉट बुकिंग और खरीद की समय सीमा भी बढ़ा दी है. स्लॉट बुकिंग की आखिरी तारीख 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है. वहीं मूंग खरीद की अंतिम तारीख 10 अगस्त से आगे बढ़ाकर 20 अगस्त की गई है.
खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित
किसानों की दूसरी प्रमुख मांग खाद वितरण के लिए शुरू की गई ई-टोकन व्यवस्था को लेकर थी. सरकार ने फिलहाल इस सिस्टम को रोकने करने का फैसला किया है.
कृषि मंत्री के अनुसार, शुरुआती स्तर पर ई-टोकन व्यवस्था में कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आई हैं. इसकी समीक्षा के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी. समिति व्यवस्था का अध्ययन कर जरूरी सुधारों के सुझाव देगी. तब तक ई-टोकन सिस्टम स्थगित रहेगा.
27 जुलाई को नर्मदापुरम से शुरू हुई थी पदयात्रा
बता दें इस आंदोलन की शुरुआत 27 जुलाई को नर्मदापुरम से हुई थी, जहां से करीब दो हजार किसान 'किसान क्रांति पदयात्रा' लेकर पैदल ही भोपाल के लिए रवाना हुए थे. अपने साथ भोजन, राशन और बिस्तर लेकर निकले किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग की, लेकिन किसान आगे बढ़ते रहे.
28 और 29 जुलाई को ओबेदुल्लागंज और मंडीदीप होते हुए किसान भोपाल की सीमा पर वीर सावरकर सेतु के पास एकत्र हो गए. सड़क पर ही भोजन बनाकर किसानों ने अपना विरोध दर्ज कराया और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की. बढ़ते प्रशासनिक दबाव और कई दौर की बातचीत के बाद 30 जुलाई को सरकार ने किसानों की मांगों पर अपनी सहमति व्यक्त की, जिसके बाद किसानों ने खुशी-खुशी अपने घर लौटना शुरू कर दिया है.
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