भोपाल में बारिश के लिए गधों को खिलाए गए गुलाब जामुन, जानिए आखिर इसके पीछे क्या है पूरी कहानी?

धर्मेंद्र साहू

• 02:16 PM • 18 Jul 2026

Bhopal News: भोपाल में लंबे समय से बारिश नहीं होने से परेशान लोगों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया. कोलार इलाके में गधों को गुलाब जामुन खिलाकर अच्छी बारिश की प्रार्थना की गई. आयोजकों का दावा है कि यह वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे अब भोपाल में भी निभाया गया.

भोपाल में गधों को खिलाए गए गुलाब जामुन
भोपाल में गधों को खिलाए गए गुलाब जामुन
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Bhopal Donkey Gulab Jamun Viral News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बारिश न होने से लोग बेहद परेशान हैं. पूरा जुलाई का महीना सूखा बीत चुका है और फसलें सूख रही हैं. इस बीच, इंद्रदेव को मनाने के लिए भोपाल के कोलार गेस्ट हाउस चौराहे पर एक अजीबोगरीब नज़ारा देखने को मिला. यहां लोगों ने बारिश करवाने के लिए गधों को गुलाब जामुन खिलाया. अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. क्या है पूरा मामला, आखिर क्यों गधों को गुलाब जामुन खिलाया गया. विस्तार से जानिए इस खबर में...

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क्या है यह पुरानी परंपरा?

दअसल, इसके पीछे एक गहरी आस्था और पुरानी परंपरा बताई जा रही है. इस आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कोई नया विचार नहीं है. शाजापुर और सुजालपुर जैसे क्षेत्रों में लोग बरसों से इसे अपनाते आए हैं. मुजाहिद सिद्दीकी, जो इस पूरी पहल का नेतृत्व कर रहे हैं, बताते हैं कि मालवा, निमाड़, खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर और जबलपुर में यह मान्यता काफी प्रचलित है. अब उसी परंपरा को भोपाल में भी शुरू किया गया है ताकि भटके हुए मानसून को वापस लाया जा सके.

किसान और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

बारिश में एक महीने की देरी से किसान और व्यापारी दोनों ही संकट में हैं. लोगों का मानना है कि यदि इंद्रदेव नाराज हैं, तो उन्हें प्रसन्न करना ही एकमात्र रास्ता है. इसी मकसद से आज 'गधे महाराज' को मिष्ठान के रूप में गुलाब जामुन खिलाई गई. स्थानीय लोगों का मानना है कि गधों को मिठाई खिलाने से इंद्रदेव जल्द प्रसन्न होंगे और शहर में अच्छी बारिश होगी.

हवन और दुआ का भी सहारा

आयोजनकर्ताओं का कहना है कि वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं. मुजाहिद सिद्दीकी ने बताया कि इस टोटके के अलावा, यदि बारिश के लिए हवन या दुआ की भी ज़रूरत पड़ी, तो वे वह भी करेंगे. उनका एकमात्र लक्ष्य किसानों और आम जनता को इस सूखे के संकट से राहत दिलाना है. लोगों को पूरा भरोसा है कि उनकी यह प्रार्थना खाली नहीं जाएगी और जल्द ही बादल बरसेंगे.