भोपाल के 85 वार्डों और 21 ज़ोन में पिछले तीन दिनों से पसरा कचरे का अंबार अब साफ होना शुरू हो जाएगा.शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पूरी तरह ठप होने से पॉश इलाकों से लेकर व्यस्त बाजारों तक लगभग 2,550 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया था.7 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारियों के काम बंद करने की वजह से पूरे भोपाल की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी.इस गतिरोध को सुलझाने के लिए सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पहले मंत्री कृष्णा गौर से मुलाकात की.इसके बाद देर रात मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई वार्ता सफल रही.सीएम से मुलाकात और सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद सफाई कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है.
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सफाईकर्मियों की 8 प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है.इसके साथ ही नियमितीकरण के पेचीदा और महत्वपूर्ण मुद्दे को सुलझाने के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने का बड़ा फैसला लिया है.राज्य सरकार ने कर्मचारियों को एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.
सफाई कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने सरकार के इस कदम की जानकारी दी. उन्होंने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों बताई
- मासिक वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करना
- ठेका प्रथा को समाप्त कर स्थायी नियुक्ति देना
- सफाईकर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना
- सेवाकाल में मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देना शामिल था.
हड़ताल खत्म होने के तुरंत बाद भोपाल नगर निगम की गाड़ियाँ सड़कों पर उतर आई हैं और जमा कचरा उठाना शुरू कर दिया है.सरकार के इस आश्वासन से जहाँ सफाई कर्मचारियों को राहत मिली है, वहीं गंदगी से परेशान भोपालवासियों ने भी राहत की सांस ली है.हालांकि, अब सभी की निगाहें नियमितीकरण के लिए गठित होने वाली कमेटी और एक महीने के भीतर आने वाले सरकारी फैसले पर टिकी हुई हैं.
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