Twisha Sharma Case: मध्य प्रदेश के ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मोड़ आया है. दिल्ली AIIMS के 5 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है. इस 11 पन्नों की सीलबंद रिपोर्ट ने मौत से जुड़े एक ऐसे बड़े सस्पेंस को खत्म कर दिया है. जिस पर अब तक सस्पेंस बना हुआ था. रिपोर्ट में वैज्ञानिक तरीके से साफ हो गया है कि ट्विशा की जान उसी जिम्नास्टिक्स बेल्ट से गई थी जो घटनास्थल से मिली थी.
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बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू ने गवाही दी
दरअसल, पहली ऑटोप्सी में ये साफ नहीं हो पाया था कि ट्विशा ने खुद की जान लेने के लिए जिस मेटल रिंग वाली जिम्नास्टिक्स बेल्ट का इस्तेमाल किया था, क्या वाकई मौत उसी से हुई थी? पहली जांच के समय यह बेल्ट डॉक्टरों के सामने पेश ही नहीं की गई थी.
अब AIIMS की हिस्टोपैथोलॉजिकल और लैब जांच में सामने आया है कि उस जिम्नास्टिक्स बेल्ट पर मानव त्वचा के अंश मौजूद थे. सबसे बड़ी बात ये है कि ये टिश्यू ट्विशा की गर्दन पर मिले चोट के निशानों से पूरी तरह मेल खा गए हैं. इस वैज्ञानिक सबूत ने साफ कर दिया है कि फंदा इसी बेल्ट से बना था.
हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली AIIMS ने संभाला था मोर्चा
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा का शव बीते 12 मई को भोपाल में उनके ससुराल में मिला था. शुरुआती जांच और पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ट्विशा के मायके वालों ने गंभीर सवाल उठाए थे. परिवार का आरोप था कि जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है. इसके बाद इंसाफ के लिए परिवार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ जांच सीबीआई को सौंपी बल्कि दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का ऐतिहासिक आदेश भी दिया.
एक महीने की बारीकी
कोर्ट के निर्देश पर AIIMS की टीम ने 24 मई को ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम किया था. यही नहीं, डॉक्टरों के इस बोर्ड ने भोपाल जाकर उस कमरे और घटना वाली जगह का मुआयना भी किया था जहां ट्विशा का शव मिला था.
AIIMS में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि टीम ने किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले करीब एक महीने तक हर छोटे-बड़े पहलू की वैज्ञानिक जांच की. इस दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स की भी मदद ली गई ताकि रिपोर्ट में कोई कमी न रह जाए. डॉ. गुप्ता के मुताबिक, "यह रिपोर्ट पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई है, जो सीबीआई और कोर्ट को निष्पक्ष न्याय तक पहुंचने में मदद करेगी."
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 10 जुलाई को यह बेहद गोपनीय रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में सीबीआई के जांच अधिकारी को सौंप दी गई है. इसके साथ ही हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट भेज दी गई है. दोबारा हुए पोस्टमार्टम की पूरी वीडियोग्राफी फिलहाल सीबीआई की कस्टडी में है. शुरुआती जांच में उलझे इस केस को सुलझाने में AIIMS की ये फोरेंसिक रिपोर्ट अब सीबीआई के लिए सबसे बड़ा और अहम हथियार साबित होने वाली है. देखना होगा कि इस नए खुलासे के बाद सीबीआई जांच की दिशा क्या मोड़ लेती है.
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