भोपाल में 50 IAS-IPS अफसरों ने जहां खरीदी जमीन, वहीं से निकला वेस्टर्न बाईपास, 11 गुना बढ़ी कीमतें

मध्य प्रदेश के भोपाल में बड़ा जमीन घोटाला! 50 IAS और IPS अफसरों ने वेस्टर्न बाईपास के पास खरीदी जमीन. 16 महीने में 11 गुना बढ़ा मुनाफा. देखें अफसरों के नाम और पूरा खुलासा.

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भोपाल में अफसरों ने क्यों खरीदीं गुरड़ी घाट में जमीनें.

आशुतोष शुक्ला

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क्या आपको पता है कि निवेश का सबसे सुरक्षित और सबसे तेज तरीका क्या है? शायद नहीं, लेकिन देश के 50 बड़े IAS और IPS अफसरों को यह जादुई फॉर्मूला पता है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास 'गुराड़ी घाट' में एक ऐसा 'संयोग' हुआ है, जिसने भ्रष्टाचार की बू को हवा दे दी है. 50 अफसर, एक ही दिन रजिस्ट्री, और 16 महीने में 11 गुना मुनाफा. क्या यह सिर्फ इत्तेफाक है या करोड़ों का सुनियोजित खेल?

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दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट का दावा है कि इन निवेशकों में न केवल मध्य प्रदेश कैडर के IAS और IPS अधिकारी शामिल हैं, बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली और हरियाणा कैडर के अधिकारी भी शामिल हैं. मामले की जांच हुई तो सामने आया कि 4 अप्रैल 2022 को एक ही रजिस्ट्री दस्तावेज के जरिए लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई थी. इस जमीन के दस्तावेज में दिखाया गया कि इसे 50 हिस्सों में खरीदा गया था.

खरीदी के 16 महीने बाद ही 'वेस्टर्न बायपास' को मिली मंजूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 50 हिस्सों के पीछे असल में 41 असली खरीदार ही थे. जमीन की रजिस्ट्री उस समय  5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी, जबकि बाजार की कीमत 7 करोड़ 78 लाख रुपए थी. इस जमीन की खरीदारी के करीब 16 महीने बाद यानी 31 अगस्त 2023 को मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के 'वेस्टर्न बायपास' प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी.

बताया जा रहा है कि ये नया बाईपास का प्रस्तावित रास्ता, अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर ही दूर है. इसके बाद जो जमीन कृषि भूमि के तौर पर वर्गीकृत थी, उसे बदलकर आवासीय कर दिया गया. ये काम बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के लगभग 10 महीने बाद यानि कि जून 2024 को कर दिया गया. इस जमीन को आधिकारिक तौर पर कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया.

ऐसे उछला जमीन का भाव

जो जमीन 2022 में लगभग 82 रुपये प्रति वर्ग फुट की अनुमानित दर पर खरीदी गई थी, वो आवासीय होने के बाद लगभग 557 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई. इसकी कुल कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये हो गई. इस इलाके में जमीन की कीमतें अब 2,500 रुपये से 3,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं, जिससे इसी जमीन की कुल अनुमानित कीमत बढ़कर लगभग 55 करोड़ रुपये से 65 करोड़ रुपये हो गई है.

इसका मतलब है कि आईएएस-आईपीएस अफसरों को 16 महीने में 11 गुना तक का फायदा हो गया.  हालांकि, जांच में यह भी सामने आया है कि प्रस्तावित विकास परियोजना के लिए अभी तक कोई हाउसिंग सोसाइटी रजिस्टर्ड नहीं हुई है. नियम कहते हैं कि आवासीय विकास का काम तभी आगे बढ़ सकता है, जब जमीन किसी रजिस्टर्ड हाउसिंग सोसाइटी को ट्रांसफर कर दी जाए या प्लॉट औपचारिक रूप से आवंटित कर दिए जाएं. 

इन अफसरों ने खरीदी जमीनें

  • प्रवीण सिंह अडायच: IAS (2012 बैच, MP कैडर) - वर्तमान में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिव हैं.
  • निशीथ मिश्रा: IPS (2004 बैच, महाराष्ट्र कैडर).
  • शैलेश कुमार जाखोटिया: IAS (2003 बैच, भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा). 
  • जयति सिंह: IAS (2016 बैच, मध्यप्रदेश कैडर). 
  • यांगचे डोलकर भूटिया: IPS (2013 बैच, मध्यप्रदेश कैडर).
  • मयंक अग्रवाल: IAS (2013 बैच, मध्यप्रदेश कैडर). 
  • रजनी सिंह: IAS (2013 बैच, मध्यप्रदेश कैडर).
  • साकेत मालवीय: IAS (2014 बैच, मध्यप्रदेश कैडर). 
  • अंशुल गुप्ता: IAS (मध्यप्रदेश कैडर).
  • अंशु सिंगला: IPS (2014 बैच, हरियाणा कैडर).
  • चहात बाजपेई: IAS (2019 बैच, तेलंगाना कैडर). 

अन्य सेवाओं के अधिकारी और परिजन

  • अनिमेष तिवारी: IRS (2016 बैच, जबलपुर के निवासी).
  • आकांक्षा तिवारी: ये भारतीय विदेश सेवा (IFS, 2017 बैच) के अधिकारी आनंद शंकर की पत्नी हैं.
  • रितु जैन: ये मध्यप्रदेश कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी मुकेश जैन की पत्नी हैं.
  • दीप कोयल: ये ओडिशा कैडर के IPS अधिकारी यातिंद्र कोयल के पुत्र हैं. 

बहरहाल सवाल यह है कि क्या इन अधिकारियों को पहले से पता था कि यहां से बायपास गुजरने वाला है?

क्या कहते हैं नियम ?

आवासीय प्लॉट तभी काटे जा सकते हैं जब कोई हाउसिंग सोसाइटी रजिस्टर्ड हो, लेकिन यहां ऐसी कोई सोसाइटी नहीं है. फिर भी जमीन का डायवर्जन हो गया. क्या यह पद का दुरुपयोग कर 'इनसाइडर इंफॉर्मेशन' का इस्तेमाल है? क्या आम जनता के हक को 'फाइलों के जादूगरों' ने अपनी जेब में डाल लिया है?

वैसे ये कोई पहली बार नहीं है. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे हो या छत्तीसगढ़ की भारतमाला परियोजना, हर जगह 'साहबों' के रिश्तेदारों ने किसानों से कौड़ियों के भाव जमीन खरीदी और सरकार को सोने के दाम पर बेची. गराड़ी घाट का ये मामला अब चीख-चीख कर जांच की मांग कर रहा है.

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