मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. हाल ही में हुए बस हादसे में घायल एक छात्रा के इलाज को लेकर अस्पताल प्रशासन पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगा है. एक वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि छात्रा के दाएं पैर में चोट और सूजन थी, लेकिन डॉक्टरों ने उसके बाएं पैर का एक्सरे कर दिया. जानिए पूरा मामला.
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एनएसयूआई ने उठाया मुद्दा
एनएसयूआई (NSUI) की जिला अध्यक्ष अपेक्षा सूर्यवंशी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना. इस दौरान उन्होंने छात्रा के परिजनों की शिकायत पर एक वीडियो बनाया, जिसमें वे दिखा रही हैं कि छात्रा को दाहिने पैर में तकलीफ है, लेकिन रिपोर्ट बाएं पैर की निकाली गई है. अपेक्षा ने इसे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान बताया और इसे लापरवाही की हद करार दिया.
अस्पताल प्रशासन की सफाई
वीडियो के सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद जिला अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉक्टर शैलेंद्र सायाम ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की. डॉक्टर ने आरोपों को 'भ्रामक' बताते हुए कहा:
मेडिकल प्रोटोकॉल: जो भी जांच हुई है, वह मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत की गई है.
दोनों पैरों की जांच: छात्रा ने दोनों पैरों में दर्द की शिकायत की थी. दाहिने पैर का एक्सरे किया गया है जो पूरी तरह नॉर्मल है.
कोई फ्रैक्चर नहीं: परीक्षण के दौरान छात्रा के घुटने में कोई फ्रैक्चर नहीं पाया गया. दाहिने जाम (Thigh) पर मामूली खरोंच थी, जिसकी पट्टी कर दी गई है.
छात्रा को चलाकर दिखाया
विवाद को शांत करने के लिए डॉक्टर ने छात्रा को सबके सामने चलाकर दिखाया और दावा किया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और चलने-फिरने लायक है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा था और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल के प्रबंधन को चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है. जहां एक तरफ इसे 'मानवीय भूल' बताया जा रहा है, वहीं अस्पताल इसे केवल एक गलतफहमी करार दे रहा है.
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