उज्जैन जमीन कंट्रोवर्सी पर एक खुलासे के बाद हमलावर हुई कांग्रेस, जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव से पूछे 4 सवाल

उज्जैन में जमीन खरीदी के खुलासे का दावा करने वाले एक अखबार की रिपोर्ट पर एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा है. कांग्रेस ने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है.

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तस्वीर: एमपी तक

आशुतोष शुक्ला

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अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के एक खुलासे के बाद अब कांग्रेस हमलावर है. एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे लेकर एक प्रेस कॉन्फेंस किया है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सरकार से सीधे सवाल पूछे हैं. वहीं, मुख्यमंत्री के परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सामान्य व्यापार बताया है. 

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जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप, दागे सवाल 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री के करीबियों, रिश्तेदारों और कंपनियों (श्री अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन, सत्यम डेवलपर) की जमीनों के आंकड़े सार्वजनिक किए. उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से 4 प्रमुख सवाल पूछे- 

  1. क्या यह सही है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद आपके परिवार और परिवार से जुड़ी कंपनियों ने 168 एकड़ भूमि अर्जित की? अगर नहीं, तो सच क्या है?
  2. क्या यह महज एक संयोग है या प्रयोग कि 111 एकड़ जमीन उसी प्रभावित क्षेत्र में खरीदी गई जहां सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और हाईवे आने वाले हैं?
  3. क्या सरकार उन सभी क्षेत्रों के भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) की सूची सार्वजनिक करेगी जहां मुख्यमंत्री के परिवार ने जमीनें खरीदी हैं?
  4. क्या मुख्यमंत्री इन सभी भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराने की घोषणा करेंगे?

सीएम मोहन यादव फैमिली में चचेरे भाई के बेटे ने क्या कहा ? 

हालांकि इस पूरे विवाद पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सीएम मोहन के परिवार की तरफ से चचेरे भाई के बेटे अनंत यादव ने साफ कहा कि एक एक नागरिक के तौर पर उन्हें जमीन खरीदने और बेचने का पूरा हक है. उन्होंने ये भी सवाल किया है कि क्या उनके परिवार का कोई व्यक्ति सीएम बन जाए तो वे अपना बिजनेस बंद कर दें. 

क्या है पूरा मामला ? 

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने से पहले भी यादव परिजन के पास कम से कम 108 प्लॉट और 179 एकड़ जमीन मौजूद थी. इनमें 85 एकड़ जमीन 2021 से 2023 के बीच खरीदी गई थी, लेकिन मोहन यादव के सीएम बनने के बाद 13 दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच मोहन यादव के परिजनों ने 168 एकड़ से ज्यादा जमीन अपने नाम की. इसमें 12 एकड़ जमीन परिजनों के भीतर ही ट्रांसफर की गई. 2025 में ही परिजनों और उनकी कंपनियों ने 92 एकड़ में फैले 62 प्लॉट और खरीदे थे. इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है कि परिवार ने जो 168 एकड़ जमीन खरीदी, उसमें से 111 एकड़ जमीन ठीक उन रास्तों और हाईवे के किनारे है, जहां से सड़कें प्रस्तावित हैं. इस पूरे मसले पर जीतू पटवारी सरकार से ये पूछ रहे हैं कि क्या ये सब करने के लिए दिल्ली से छूट मिली हुई है ?

इस पूरे मामले पर अभी तक बीजेपी और सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस पूरे मसले पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सीएम के चचेरे भाई के बेटे अनंत यादव ने कहा कि हमारा परिवार 2010 से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है.  निजी नागरिक होने के नाते हमें जमीन खरीदने और बेचने का पूरा अधिकार है. क्या सिर्फ  इसलिए कारोबार बंद कर देना चाहिए क्योंकि क्यों मुख्यमंत्री हमारे परिवार से ताल्लुक रखते हैं. 

वहीं एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि मुख्यमंत्री का परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है. उनके कारोबार को मुख्यमंत्री की राजनीतिक जीवन से जोड़ना उचित नहीं होगा. इस अधिकारी ने यह भी कहा, जब आप परिवार की बात करते हैं, तो केवल पत्नी, बेटा और बहू को शामिल करना चाहिए. वहां आपको कोई बड़ी बात नहीं मिलेगी.  फिलहाल इस मामले ने राज्य का सियासी माहौल को गरमा दिया है. अगर बीजेपी या सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई  प्रतिक्रिया आती है तो Newstak.in के एमपी सेक्शन में हम जरूर बताएंगे. 

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