असम स्थित सीआरपीएफ (CRPF) कैंप में हुई फायरिंग की दुखद घटना में जान गंवाने वाले मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के वीर जवान विष्णु बघेल का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर उनके गृह गांव पहुंचा तो पूरा माहौल गमगीन हो उठा. तहसील मुख्यालय परसवाड़ा की सड़कों पर हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. 'भारत माता की जय' और 'जब तक सूरज चांद रहेगा, विष्णु तुम्हारा नाम रहेगा' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा.
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फूट-फूटकर रो पड़ी पत्नी, बेसुध हुए बुजुर्ग माता-पिता
34वीं बटालियन में तैनात हेड कांस्टेबल विष्णु बघेल अपने बुजुर्ग माता-पिता के इकलौते बेटे थे. जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर के आंगन में पहुंचा, पत्नी अपने पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं. इस दिल दहला देने वाले मंजर को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. जवान के पीछे उनके बूढ़े माता-पिता और दो मासूम बच्चे छूट गए हैं.
परिजनों और ग्रामीणों ने रखीं 3 प्रमुख मांगें
- अंतिम संस्कार से पहले गहरे शोक में डूबे परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी मांगे रखीं:
- शहीद का आधिकारिक दर्जा: जवान विष्णु बघेल को आधिकारिक तौर पर शहीद का दर्जा दिया जाए.
- माता-पिता के इलाज का खर्च: शहीद के बुजुर्ग व बीमार माता-पिता के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए.
- बच्चों की शिक्षा व नौकरी की गारंटी: दोनों मासूम बच्चों के बेहतर भविष्य, मुफ्त शिक्षा और भविष्य में सरकारी नौकरी की गारंटी दी जाए.
मौके पर मौजूद सीआरपीएफ अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने वरिष्ठ अधिकारियों तक बातें पहुंचाने और नियमानुसार प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया.
प्रशासन की गैर मौजूदगी पर बिफरे विधायक
दुख की इस घड़ी में जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों (कलेक्टर व एसपी) के मौके पर न पहुंचने को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध जताया. विधायक मधु भगत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि असम से हवाई मार्ग से एक जवान का पार्थिव शरीर आया है, लेकिन यहां कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौजूद नहीं हैं. उन्होंने इसे सरकार और प्रशासन की असंवेदनशीलता बताते हुए कड़ी निंदा की.
कैसे हुई थी यह दर्दनाक घटना?
यह घटना 4 अगस्त को असम के सीआरपीएफ कैंप में घटी थी. मिली जानकारी के अनुसार, एएसआई बल्लानी प्रेमा भ्रम ने मुख्य गेट के गार्ड रूम से इंसास राइफल लेकर बैरक की तरफ अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस गोलीबारी में एसआई रामनवाल सिंह यादव और हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल गोली लगने से शहीद हो गए.
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