मध्य प्रदेश के दतिया जिले में सरकारी आवासों पर लंबे समय से अवैध कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है . बुधवार को राजघाट कॉलोनी में जिला प्रशासन और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब एक दर्जन से अधिक शासकीय क्वार्टरों को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान सियासी घमासान तब मच गया जब प्रशासनिक टीम पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की करीबी और भाजपा नेता क्रांति राय का सरकारी आवास खाली कराने पहुंची.
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नरोत्तम मिश्रा के समर्थक पर कार्रवाई से तीखी बहस
कार्रवाई के दौरान पूर्व जनपद सदस्य एवं भाजपा नेता क्रांति राय और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जमकर तीखी बहस हुई. क्रांति राय का कहना है कि वे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की समर्थक हैं, इसलिए उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासन भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस भरी बरसात में उनका सामान बाहर फेंक दिया गया है और प्रशासन के इस बर्ताव के खिलाफ वे जल्द ही आंदोलन करेंगी.
प्रशासन की वीडियोग्राफी और सामान की लिस्टिंग
विवाद की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई. अधिकारियों की मौजूदगी में घर के अंदर मौजूद सामान की बाकायदा सूची तैयार की गई और उसके बाद सामान को शासकीय आवास से बाहर निकाला गया.
SDM सोनाली राजपूत का बयान: 'नियमों के तहत हुई बेदखली'
इस पूरे मामले पर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) सोनाली राजपूत ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के दायरे में रहकर की जा रही है.
SDM के मुताबिक:
- सभी कब्जाधारियों को पहले ही नोटिस जारी कर अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया गया था.
- पक्ष न रखने या पात्रता साबित न होने पर न्यायालय के समक्ष बेदखली का आदेश पारित किया गया.
- जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने एक साथ दो-दो सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा कर रखा था.
क्या है सियासी मायने?
दतिया में सरकारी क्वार्टरों पर हुई इस बेदखली कार्रवाई के बाद जिले का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. स्थानीय गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि क्या यह सिर्फ अवैध कब्जा हटाने का नियमित प्रशासनिक अभियान है या इसके पीछे कोई सियासी संदेश भी छिपा है.
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