Datia Assembly By-Polls: दतिया उपचुनाव में किसके सिर सजेगा ताज? नरोत्तम मिश्रा की गैरमौजूदगी और स्थानीय मुद्दों पर क्या बोली जनता

अशोक शर्मा

24 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 24 2026 4:02 PM)

दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रचार तेज हो गया है, जहां स्थानीय मुद्दों और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की गैरमौजूदगी के बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.

दतिया उपचुनाव
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Datia By-Election: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ही दल चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. प्रत्याशी गली-मोहल्लों से लेकर गांवों तक मतदाताओं को साधने में जुटे हैं. लेकिन दतिया की जनता का दिल आखिर किसके साथ है? MP Tak की टीम ने दतिया के प्रसिद्ध राजगढ़ चौराहे पर पहुंचकर आम लोगों, स्थानीय दुकानदारों और बुजुर्गों से बातचीत की और चुनावी मिजाज को जाना.

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ग्राउंड पर कैसा है माहौल?

राजगढ़ चौराहे पर हुई बातचीत से साफ है कि दतिया में मुकाबला काफी दिलचस्प और मिला-जुला नजर आ रहा है. जहां एक तबका विकास के नाम पर बीजेपी के साथ खड़ा दिखता है, वहीं दूसरा वर्ग स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशी बदलाव को लेकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनने की बात कह रहा है.

नरोत्तम मिश्रा की अनुपस्थिति और नए चेहरे की चर्चा

बातचीत के दौरान कुछ स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने बताया कि इस बार पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की चुनावी मैदान में गैरमौजूदगी एक बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है.

कुछ मतदाताओं का मानना है कि बीजेपी के नए प्रत्याशी (आशुतोष) को जनता के बीच खुद को स्थापित करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है.

एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "यदि नरोत्तम जी होते तो विषय अलग होता. नए प्रत्याशी होने की वजह से बीजेपी को बहुत मेहनत करनी पड़ रही है. इस स्थिति का फायदा कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को मिलता दिख रहा है."

महंगाई, बेरोजगारी और खाद की किल्लत प्रमुख मुद्दे

कांग्रेस का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि दतिया में इस समय बेरोजगारी और महंगाई सबसे बड़े चुनावी मुद्दे हैं.

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने खाद (Fertilizers) की किल्लत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, फिर भी समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है. इसके अलावा रसोई गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम और आम जीवन में बढ़ती महंगाई को लेकर भी लोगों में असंतोष देखा गया.

विकास के नाम पर बीजेपी के साथ खड़ा एक वर्ग

दूसरी ओर, बीजेपी समर्थकों और कई बुजुर्ग मतदाताओं का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए भारतीय जनता पार्टी ही सबसे बेहतर विकल्प है. एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, "अगर दतिया में विकास चाहिए, तो बीजेपी आगे रहेगी. चुनाव परिणाम आने पर फैसला विकास के हक में ही होगा."

3 तारीख को होगा फैसला

दतिया के राजगढ़ चौराहे का चुनावी मिजाज बताता है कि मुकाबला फिलहाल बराबरी का और फंसा हुआ दिख रहा है. जहां एक तरफ कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी और खाद समस्या को हथियार बनाकर बढ़त का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी विकास के ट्रैक रिकॉर्ड पर चुनावी बाजी पलटने की उम्मीद में है. मतदाता फिलहाल अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोल रहे हैं और असली फैसला मतगणना के दिन ही साफ होगा.

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