Datia Assembly Bypoll 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव के लिए प्रचार का शोर थमने की कगार पर है और 30 जुलाई को मतदान होना है. हालांकि, इस बार दतिया का चुनावी मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के चुनाव चिन्हों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों ही दलों के भीतर सुलग रही गुटबाजी और भीतरघात (cross-party damage) का असर परिणाम पर पड़ता दिख रहा है.
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बीजेपी में टिकट कटने की कसक और संगठन की चुनौती
भाजपा ने छह बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संघ पृष्ठभूमि के आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया है. इसके बाद से ही चुनाव विकास के मुद्दों से हटकर समर्थकों की नाराजगी के इर्द-गिर्द सिमट गया है. हालांकि, डॉ. नरोत्तम मिश्रा खुद चुनाव मैदान में नहीं हैं, फिर भी पूरी भाजपा चुनावी रैलियों में यह संदेश देने में जुटी है कि यह चुनाव उन्हीं के मार्गदर्शन में लड़ा जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक सभी वरिष्ठ नेता पार्टी के कैडर और नरोत्तम समर्थकों को एकसाथ साधने में लगे हुए हैं.
कांग्रेस में गुटबाजी और बयानों का घमासान
दूसरी ओर, कांग्रेस की राह भी आसान नजर नहीं आ रही है. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के सामने पार्टी के अपने ही नेताओं की नाराजगी बड़ी चुनौती बनी हुई है. पूर्व विधायक राजेंद्र भारती प्रचार से पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं. नाराजगी का कारण बताया जा रहा है कि प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने पर सहानुभूति जताते हुए उन्हें मजबूत नेता कह दिया था.
क्या आजाद समाज पार्टी बिगाड़ेगी कांग्रेस का खेल?
दतिया उपचुनाव को त्रिकोणीय बनाने में आजाद समाज पार्टी (ASP) के दामोदर यादव अहम भूमिका निभा रहे हैं.
- दलित और पिछड़ा वोटबैंक: विश्लेषकों के अनुसार, यदि दामोदर यादव दलित और पिछड़े वोट बैंक में सेंध लगाते हैं, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है.
- 2023 का गणित: ऐसा ही समीकरण 2023 के चुनाव में पास की सेवड़ा सीट पर देखा गया था, जहां आजाद समाज पार्टी को 29,000 से ज्यादा वोट मिले थे और कांग्रेस महज 25,000 वोटों से पिछड़ गई थी.
यही वजह है कि कांग्रेस अब दामोदर यादव पर भाजपा की 'बी-टीम' होने का आरोप लगा रही है.
30 जुलाई को वोटिंग, 3 अगस्त को नतीजे
स्थानिय राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दतिया के इस मुकाबले में दोनों ही पार्टियों के कुछ नेता अंदर ही अंदर दूसरी पार्टी के संपर्क में हैं. यह गुपचुप भीतरघात नतीजों के समीकरण बदल सकता है. दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है.
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