मध्य प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट दतिया का सियासी पारा थामे नहीं थम रहा है. पूर्व गृहमंत्री और कद्दावर बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में भड़का उनके समर्थकों का गुस्सा अब खुद बीजेपी नेताओं के लिए ही गले की हड्डी बनता जा रहा है.
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अपनी ही सरकार में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस का हंटर लगातार चल रहा है. हाईवे जाम और पुलिस से झड़प के बाद अब दतिया पुलिस ने नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के खिलाफ एक और बड़ी एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है, जिससे सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है.
पुलिस की रडार पर प्रशांत ढेंगुल्ला
दतिया में हुए भारी बवाल के बाद पुलिस की कार्रवाई बहुत सख्त नजर आ रही है. पहले मामले में पुलिस ने हाईवे पर चक्काजाम करने वाले 27 नामजद और करीब 200 अज्ञात बीजेपी समर्थकों पर बल प्रयोग किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद मुकदमा दर्ज किया.
अभी बीजेपी नेता इस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि कोतवाली थाना पुलिस ने जबरन बाजार बंद कराने को लेकर एक और एफआईआर दर्ज कर दी है. पुलिस के मुताबिक, किला चौक पर दुकानदारों को डराकर बाजार बंद कराने के आरोप में 8 से 10 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज हुआ है, जिनकी पहचान सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और गवाहों के जरिए की जा रही है. इसी दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दतिया नगरपालिका अध्यक्ष के बेटे और बीजेपी नेता प्रशांत ढेंगुल्ला पुलिस अधिकारी रमेश शाक्य से तीखी बहस करते और धौंस जमाते नजर आ रहे हैं.
अपराधियों पर दबिश, जिलाबदर और फ्लैग मार्च तेज
दतिया में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा क्षेत्र में लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है. चुनाव को प्रभावित करने वाले और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले अपराधियों के घरों पर दबिश दी जा रही है.
अब तक कई लोगों को जिलाबदर (जिल्ले से बाहर) करने की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि सैकड़ों संदिग्धों को बाउंड ओवर किया गया है. प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर कोई उन्हें डराता-धमकाता है, तो वे तुरंत 'सी-विजिल' (C-Vigil) ऐप पर शिकायत दर्ज कराएं.
क्या दतिया में कमजोर पड़ रहा है नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव?
अपनी ही बीजेपी सरकार में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों और बड़े नेताओं पर हो रही इस बैक-टू-बैक सख्त कार्रवाई ने राजनीतिक विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. सियासी गलियारों में अब यह बड़ा सवाल गूंज रहा है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों पर इतनी कड़ाई किसके इशारे पर हो रही है? दतिया की राजनीति में दशकों तक एकछत्र राज करने वाले नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों पर पुलिस का यह कड़ा रुख कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है.
चर्चा इस बात की भी है कि क्या अब संगठन और प्रशासन दतिया में नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव को दरकिनार कर इस हुड़दंग को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है, या फिर दतिया की सत्ता का केंद्र अब बदल चुका है.
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